भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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82 मुकुन्दमाल कुल : तनयुलु, अनुजुलु अनु मोसळ्लगुम्पु चेत आकुलमै युन्नदि. (तनयुलु, अनुजुलु सौम्मु पञ्चि यिम्मनि बाधिन्तुरु). स्वामि : ई समुद्रमु पेरेमि? कुल : संसारमु. स्वामि : लोतुग नुन्नदा? कुल : मिगुल लोतुगनुन्नदि. कान ओ त्रिधामूडा=श्वेत दीपमु अनन्तासनमु, वैकुण्ठमुन नुण्डुवाडा, लेक मूडुवे दमुलन्दुनु सम्बन्धपडिनवाडा, त्रैलोक्यवासी, मूडव स्थलयन्दु नुण्डेडिवाडा! भक्ति नाव निम्मु. (जलमुण्डिन पैनि तेल्पबडिन यनर्थमुलु कलुगुनु. जलमुलेनिचोट नटुश्रम कलुगदु. ई रीतिगने आशयुण्डु पक्षमुन अदि मीदि यनर्थमुलकु मूलमगुनु. आशलेकुन्न बन्धुवुलेल? आशाजलमु वलन गालियललु कलिगेनु. स्वाधीनमुतप्पेनु. आशचेत विपरीत ज्ञानमु, मन्मथ विकारमु कलिगेनु. भार्य यणचेनु. दानिवलन कलिगिन बिड्डलयोक्क, सहजन्मुलयोक्क बाधकलिगेनु. आशवीडि नचो अन्नियुनु पोवुनु. ए बन्धुवुयोक्क पनियुनु जरुगजालदु. संसार समुद्रमुनकु आशयनु जलमे कारणमु). 15 माद्राक्षं क्षीणपुण्यान् क्षणमपि भवतो भक्तिहीनान् पदाब्जे माश्रौषं श्राव्यबन्धं तव चरित मपास्याऽन्य दाख्यानजातम्, मा स्मार्षं माधव त्वामपि भुवनपते चेतसापह्नुवाना न्मा भूवं त्वत्सपर्या व्यतिकररहितो जन्मजन्मान्तरेऽपि.