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नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

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तीसरा अङ्क [मस्त, विचित्र तथा विह्वल (अटपट) वेष धारण किए हुए, हाथ में शराब का प्याला लिए हुए विट और कन्धे पर शराब का मटका रखे चेट का प्रवेश ] विट — जो नित्य शराब पीते हैं वह बलदेव, और जो लोगों को अपने प्रियजनों से मिलाते हैं वह कामदेव — ये दोनों ही मेरे (पूज्य) देवता हैं । (झूमते हुए) सचमुच मुझ शेखरक का जीवन सफल है :— जिसकी छाती पर प्राणप्यारी, मुख में नील कमलों से सुवासित शराब और सिर पर फूलों का मुकुट नित्य रहते हैं । (लड़खड़ाते हुए) अरे ! मुझे कौन हिला रहा है ? ( प्रसन्नता के साथ ) जरूर नवमालिका मुझ से हंसी कर रही है ।


  1. विह्वल = बिखरी हुई, अटपटी ( वेष भूषा ) ( १०७ )