नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १५ ) (iii) मातृगुप्त का आश्रय-दाता उज्जयिनी-नरेश हर्ष विक्रमादित्य; (iv) कान्य कुब्ज का राजा हर्ष वर्धन । विल्सन ने रत्नावली काश्मीर नरेश हर्ष (१११३-२५ ई०) की बताई है । परन्तु यह ठीक नहीं है, क्योंकि पञ्च बार क्षेमेन्द्र (११वीं शताब्दी) और एक बार दामोदर गुप्त (८वीं शताब्दी) ने इस नाटिका का उल्लेख किया है । इस लिए रत्नावली का कर्ता ८वीं शताब्दी से कहीं पहिले का होना चाहिए । इसी कारण से ही हम धारानरेश भोज के पितामह हर्ष को भी इन नाटकों का कर्ता नहीं मान सकते क्योंकि उन का समय ९४८ से ९७२ ई० था । और उज्जयिनीनरेश हर्ष विक्रमादित्य के तो ऐतिहासिक व्यक्ति होने में भी सन्देह है । अतः कान्यकुब्ज के राजा हर्ष वर्धन ही इन नाटकों के रचयिता हो सकते हैं। इस विषय में इत्सिंग की साक्षी उल्लेखनीय है । उस ने कहा है कि राजा शिलादित्य (हर्षवर्धन का दूसरा नाम) ने बोधिसत्व जीमूतवाहन की कथा लिख कर उसका अभिनय करवाया और इस प्रकार इस कथा को लोकप्रिय बनाया । बाण ने भी हर्ष की विद्वत्ता की प्रशंसा की है और विशेषतः काव्यकला में उसकी मौलिकता की सराहना की है।