भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

पृष्ठ 185, कुल 309 में से

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पृष्ठ 185

चौथा अङ्क [दो लाल वस्त्र लिए हुए कञ्चुकी और द्वारपाल का प्रवेश] कञ्चुकी – अन्तःपुर (अथवा नगर के बीच) व्यवस्था करने वाला, पग पग पर ठोकरों को बचाता हुआ (अथवा, त्रुटियों या ग़लतियों का समाधान करता हुआ), एवं वृद्धावस्था से विह्वल हुआ (हाथ में) डण्डा लेकर (अथवा दण्डनीति का आश्रय लेकर) मैं राजा के सारे आचरण का अनुकरण कर रहा हूँ। प्रतीहार – आर्य वसुभद्र ! आप किधर चल पड़े हैं। कञ्चुकी – मित्रावसु की माता, महारानी जी, ने मुझे आज्ञा दी है कि “हे कञ्चुकी ! दस रात तक आप मलयवती और दामाद (जीमूतवाहन) के पास (माङ्गलिक) लाल वस्त्र ले जाया करें”। पुत्री (मलयवती) तो ससुराल में है। और जीमूतवाहन भी सुना है कि युवराज (मित्रावसु) के साथ आज समुद्र-तट देखने गए हैं। अतः मेरी समझ में नहीं आता कि राजकुमारी के पास जाऊँ या दामाद के पास। प्रतीहार – आर्य ! राजपुत्री के पास ही जाना ठीक होगा। सम्भवतः दामाद स्वयं भी इस समय तक वहीं आ गए होंगे। कञ्चुकी – तुमने ठीक कहा है। अच्छा, तो तुम किधर जा रहे हो ?

  1. व्यवस्था = इन्तज़ाम, प्रबन्ध, अनुशासन ।
  2. अन्तःपुर, सँस्खलितानि, दण्डनीत्या- के दो दो अर्थ हैं, एक कञ्चुकी के साथ दूसरा राजा के साथ। देखिए अनुवाद ! ( १५५ )