नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished309 पृष्ठ
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( १६७ ) [ पीछे पीछे आ रही रोती हुई बुढ़िया के साथ शङ्खचूड़ और दो वस्त्रों को छिपाए हुए नौकर का प्रवेश ] वृद्धा — (आँसुओं के साथ) - हाय बच्चे शङ्खचूड़ ! क्या आज मुझे तुम्हें मारे जाते हुए को देखना होगा ? (ठुड्डी पकड़ कर) इस मुखचन्द्र के बिना आज पाताल लोक अन्धकारमय हो जाएगा । शङ्खचूड़— माता जी ! इस प्रकार की व्याकुलता से आप मुझे और अधिक पीड़ा क्यों दे रही हैं ? वृद्धा — (अच्छी तरह देखकर, पुत्र के अङ्गों को छूती हुई) हाय पुत्र ! जिसने कभी सूर्य की किरणों को नहीं देखा ऐसे तेरे इस कोमल शरीर को क्रूर हृदय वाला गरुड़ कैसे खाएगा ? [ गले लगाकर रोती है ] शङ्खचूड़ — माता जी ! बस, (इस) विलाप को रहने दीजिए । देखिए —
- निर्घृण = दयाहीन, निर्दयी, क्रूर ।
- अलं = बस, बस । इस अर्थ में अलम् के साथ तृतीया आती है ।