भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

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I भौगोलिक तथा ऐतिहासिक उल्लेख प्रथम अंक:- १. अनङ्ग=कामदेव ! जब देवताओं को यह पता लगा कि राक्षस तारक से बचाने में पार्वती का पुत्र ही सहायक हो सकता है और पार्वती शिवजी को छोड़ और किसी से विवाह नहीं करेगी तो कामदेव ने कहा कि मैं प्रयत्न करता हूँ कि शिवजी पार्वती से शादी करने पर राज़ी हो जाएँ । शिवजी उस समय तपस्या में लीन थे । कामदेव द्वारा तपस्या भङ्ग होने से शिवजी अति क्रुद्ध हुए और उनके तृतीय नेत्र से ऐसी अग्नि निकली जिसने कामदेव के शरीर को जला कर राख कर दिया । फिर कामदेव की पत्नी रति के अनुनय विनय करने पर शिवजी ने कामदेव को जिला तो दिया परन्तु शरीर नहीं दिया। अतएव उसे अनङ्ग अर्थात् अङ्गरहित कहते हैं । २. बुद्ध=जिस को अन्तर्ज्ञान प्राप्त हो गया हो । बौद्धमत के प्रवर्तक शाक्यमुनि को बुद्ध कहते हैं क्योंकि उन्हें परम ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी ! उन का जन्मनाम सिद्धार्थ था । वे कपिलवस्तु में उत्पन्न हुए थे और ५४३ पूर्वैसा उनका देहान्त हुआ । उनके पिता शाक्यराज शुद्धोदन थे और उनकी माता का नाम था माया देवी । उन का विवाह राजकुमारी यशोधरा से हुआ था ! उस से उनके राहुल नामी एक पुत्र भी हुआ था । पुराणों में बुद्ध को विष्णु का नवाँ अवतार भी माना है ! (२६८)