नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २६६ ) ३. जिन = विजयी। बुद्ध को जिन भी कहते हैं क्योंकि उन्हों ने जीवन इन्धनों पर विजय प्राप्त की थी। मार की अप्सराओं की चेष्टाओं का उन पर कोई प्रभाव नहीं हुआ था और वे पूर्ण रूप से शान्त रहे थे। ४. इन्द्रोत्सव = देवराज इन्द्र के उपलक्ष में मनाया जाने वाला महोत्सव। इस को इन्द्रध्वज महोत्सव भी कहते हैं। रघुवंश में भी इस का उल्लेख मिलता है। वर्षा की यथेष्ट प्राप्ति के लिए राजालोग भाद्रशुक्लद्वादशी को इन्द्र के झण्डे का जलूस निकालते थे। कहते हैं सर्व प्रथम संस्कृत नाटक इसी अवसर पर अभिनीत हुआ था। ५. मतङ्ग = यह जीमूतवाहन का प्रतिपक्षी है। जब जीमूतवाहन वन में माता पिता की सेवा के लिए गया हुआ था तो उस की अनुपस्थिति में मतङ्ग ने उसके राज्य को आत्मसात् कर लिया। परन्तु जब गौरी ने जीमूतवाहन को विद्याधरोंका सम्राट् नियुक्त कर दिया तो मतङ्ग भी आकर उनके आगे नतमस्तक हुआ। ६. मलयपर्वत = दक्षिण भारत में एक पर्वत श्रेणी है। इस में चन्दन वृक्षों का बाहुल्य है। कवि लोग प्रायः ऐसा वर्णन करते हैं कि दक्षिण की ओर से आने वाली वायु इन चन्दनवृक्षों की सुगन्धि को लेकर आती है। ७. शशभृत् = चन्द्रमा ! कहते हैं कि चन्द्रमा के बीच जो कलङ्क सा है वह आकार में खरगोश से मिलता जुलता है। अतएव चन्द्र को शशभृत् अथवा शशाङ्क (खरगोश के चिन्ह वाला) कहते हैं।