नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्राक्कथन संस्कृत श्री हर्ष रचित 'नागानन्द' नाटक का यह विद्यार्थी संस्करण प्रस्तुत करते हुए आज हमें अत्यन्त हर्ष तथा आनन्द हो रहा है। अपने कई वर्षों के अध्यापन-अनुभव से लाभ उठा कर हम ने वही चीज़ों इसमें देने का प्रयत्न किया है जिन की विद्यार्थियों को आवश्यकता होती है। अनावश्यक अंश को कहीं भीतर नहीं आने दिया। और भी कई मान्य संस्करण 'नागानन्द' के मिलते हैं। तो फिर इस संस्करण के प्रकाशित करने की क्या आवश्यकता थी ? प्रस्तुत संस्करण में कई एक विशेषताएँ हैं। यथा :- १. एक पृष्ठ पर संस्कृत पाठ है तो उसके सामने वाले पृष्ठ पर उसी का भाषा-अनुवाद। २. मौलिक प्राकृत पाठों की संस्कृत छाया उन की निचली पंक्तियों में छोटे प्रिण्ट में दी गई हैं। इस से न केवल संस्कृत छाया अपितु प्राकृत के नियमों को भी समझने में विद्यार्थी को सुभीता होगी। ३. आवश्यक टिप्पणियां प्रत्येक पृष्ठ पर अनुवाद के नीचे दे दी हैं। पुस्तक के पृष्ठ पलटने की आवश्यकता नहीं। ४. प्रत्येक श्लोक का अन्वय संस्कृत पाठ वाले पृष्ठ पर नीचे दिया गया है जिस से उस श्लोक को समझना सरल होगा ! ५. आरम्भ में विस्तृत भूमिका दी है, जिस में संस्कृत नाट्य-कला की उत्पत्ति, 'नागानन्द' की कथावस्तु, इस के कर्ता के जीवन तथा नाट्यकला के बारे, प्रमुख पात्रों का चरित्र-चित्रण इत्यादि अनेक उपयोगी विषय हैं।