भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

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दूसरा अङ्कः । [चेटी का प्रवेश] चेटी — राजकुमारी मलयवती ने मुझे आज्ञा दी है कि 'सखी, मनोहरिके ! आज मेरे भाई श्री मित्रावसु ने देर कर दी है। अतः जाकर पता लगा कि वह आ गए हैं कि नहीं। (घूमती है) (नेपथ्य की ओर देख कर) परन्तु यह कौन जल्दी जल्दी इधर ही आ रही है ? (अच्छी तरह देख कर) क्या चतुरिका है ? [चतुरिका का प्रवेश] मनोहरिका— (पास जाकर) अरी चतुरिके ! क्या कारण है कि मुझे छोड़ कर जल्दी से चली जा रही हो । चतुरिका—मनोहरिके ! राजकुमारी मलयवती ने मुझे आज्ञा दी है कि-

  1. यहां 'पुनः' 'परन्तु' के अर्थ में प्रयुक्त है । ( ५१ )