भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

पृष्ठ 97, कुल 309 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 97

( ६३ ) चेटी - राजकुमारी, अभी 'वर' शब्द के उच्चारण से ही उत्पन्न हुई इस घबराहट से (आपने सब कुछ) कह दिया है । अतः (और अधिक) सन्तप्त न हो । यदि मैं (सचमुच) चतुरिका हूँ तो वह भी आप को देखे बिना क्षण भर भी (कहीं) आनन्द नहीं ले सकेगा । यह भी मैंने देख लिया है । नायिका- (आंसुओं के साथ) हमारे इतने भाग्य कहाँ ? चेटी - राजकुमारी, ऐसा न कहो । क्या भगवान् विष्णु छाती पर लक्ष्मी को उठाए बिना सुखी हो सकते हैं ? नायिका- क्या मित्रजन प्रिय बातों को छोड़ अन्य कुछ बोलना (भी) जानते हैं ? सखी, इसलिए भी मेरा सन्ताप और अधिक

  1. निर्वृत्तः = सुखी, शान्त ।