नलचम्पू / दमयन्ती-कथा (त्रिविक्रम भट्ट - विषमपदप्रकाश व्याख्या सहित सम्पूर्ण ७ उच्छ्वास)
Nala Champu (Damayanti Katha) of Trivikrama Bhatta with Commentary
त्रिविक्रम भट्ट द्वारा
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॥ श्रीः ॥ [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ] [अत्यधिक धुंधला/अपाठ्य पाठ]