भारतकोश
नारद पञ्चरात्र (भारद्वाज संहिता - वैष्णव आगम एवं प्रपत्ति-धर्म सटीक)

नारद पञ्चरात्र (भारद्वाज संहिता - वैष्णव आगम एवं प्रपत्ति-धर्म सटीक)

Narada Pancharatra Bharadwaja Samhita with Commentary

महर्षि भारद्वाज / देवर्षि नारद द्वारा

DevanagariHindipublished176 पृष्ठ

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२३ नारदपञ्चरात्र भारद्वाजसंहिता विषयानुक्रमणिका विषय श्लोक संख्या पृष्ठ न्यासोपदेशो नाम प्रथमोऽध्यायः १-१०० २५-४६ ऋषिगण का भारद्वाज मुनि से धर्मविषय प्रश्न १-२ २५-२५ भारद्वाजमुनि द्वारा न्यासयोग का कथन तथा विवरणादिवर्णन ३-७ २६-२७ भगवत्प्रपत्तिरूप न्यास का माहात्म तथा प्रतिपाद्य विषय- ८-२७ २७-३१ प्रपत्ति के गुणानुगत प्रभेद महत्ता एवं फल २८-३२ ३१-३२ न्यासदीक्षाप्रदाता आचार्य एवं उनका लक्षणादिविवरण ३३-५९ ३२-३८ शिष्य या साधक को प्रदेय मन्त्र तथा उसके कर्मादि की मीमांसा तथा प्रपत्तिस्वरूप- ६०-७० ३८-४० वृत्ति का स्वरूप सम्बन्ध एवं प्रभेद ७१-८९ १६-२० वृत्ति काल के मध्य आनेवाले दोष तथा दुरितादि ९०-१०० ४४-४६ प्रपत्तिधर्मादिनिरूपणो नाम द्वितीयोऽध्यायः १-१ ४७ न्यासोपदेशो नाम तृतीयोऽध्यायः १-१०० ४८-६७ दीक्षित साधक द्वारा इष्टाराधन कर्म तथा सत्सेवन १-२६ ४८-५३ इष्टाराधक का आचार तथा उसके द्वारा इसका अन्यों को उपदेश २७-३५ ५३-५४ एकान्ती साधक द्वारा साङ्गवेदादि का स्वाध्याय तथा आराधनादि ३६-४५ ५४-५६ भक्ति के क्रम में होनेवाली आराधनादि विधानादि ४६-५८ ५७-५९ दीक्षाक्रम में शिष्य को चक्राद्यङ्कन संस्कार, उसके आचार एवं प्रयोजन का विवरण ५९-८१ ५९-६३ सत्सेवन एवं उसके विधानादि ८२-१०० ६३-६७ न्यासोपदेशो नाम चतुर्थोऽध्यायः १-१०० ६८-८७ विहिताचार तथा विरुद्धवर्जनादि का विवरण १-१६ ६८-७१ दृष्टि विरोध १७-२६ ७१-७३ भक्ति विरुद्धता- २७-३५ ७३-७५ लक्ष्य विरुद्धता- ३६-५७ ७५-७९ सत्सेवा विरुद्धता ५६-७९ ७९-८३ न्यासयोग से प्रपन्न साधक की परिणति तथा न्यासयोग माहात्म्य ८०-१०० ८३-८७