भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
करके भगवान् शिवका पूजन, प्रत्येक मासकी पूर्णिमा और अमावास्याको शिवाराधन तथा गङ्गा-दशहराके पुण्य-कृत्य एवं उनका माहात्म्य ............. ६६४बलभद्र तथा सुभद्राके और भगवान् नृसिंहके दर्शन-पूजन आदिका माहात्म्य ७०३
१३७- गयातीर्थकी महिमा ......................... ६७११४९- श्वेतमाधव, मत्स्यमाधव, कल्पवृक्ष और अष्टाक्षर-मन्त्र, स्नान, तर्पण आदिकी महिमा ........................................... ७०७
१३८- गयामें प्रथम और द्वितीय दिनके कृत्यका वर्णन, प्रेतशिला आदि तीर्थोंमें पिण्डदान आदिकी विधि और उन तीर्थोंकी महिमा ............................................. ६७४१५०- भगवान् नारायणके पूजनकी विधि ....... ७१०
१३९- गयामें तीसरे और चौथे दिनका कृत्य, ब्रह्मतीर्थ तथा विष्णुपद आदिकी महिमा ............................................. ६७९१५१- समुद्र-स्नानकी महिमा और श्रीकृष्ण-बलराम आदिके दर्शन आदिकी महिमा तथा श्रीकृष्णसे जगत्-सृष्टिका कथन एवं श्रीराधा-कृष्णके उत्कृष्ट स्वरूपका प्रतिपादन ....................................... ७१३
१४०- गयामें पाँचवें दिनका कृत्य, गयाके विभिन्न तीर्थोंकी पृथक्-पृथक् महिमा ... ६८२१५२- इन्द्रद्युम्न-सरोवरमें स्नानकी विधि, ज्येष्ठ मासकी पूर्णिमाको श्रीकृष्ण, बलराम तथा सुभद्राके अभिषेकका उत्सव ....... ७१५
१४१- अविमुक्त क्षेत्र—काशीपुरीकी महिमा .... ६८६१५३- अभिषेक-कालमें देवताओंद्वारा जगन्नाथजीकी स्तुति, गुण्डिचा-यात्राका माहात्म्य तथा द्वादश यात्राकी प्रतिष्ठा-विधि ................................... ७१७
१४२- काशीके तीर्थ एवं शिवलिङ्गोंके दर्शन-पूजन आदिकी महिमा .................... ६८९१५४- प्रयाग-माहात्म्यके प्रसङ्गमें तीर्थयात्राकी सामान्य विधिका वर्णन .................... ७२०
१४३- काशी-यात्राका काल, यात्राकालमें यात्रियोंके लिये आवश्यक कृत्य, अवान्तर तीर्थ और शिवलिङ्गोंका वर्णन ........... ६९११५५- प्रयागमें माघ-मकरके स्नानकी महिमा तथा वहाँके भिन्न-भिन्न तीर्थोंका माहात्म्य .......................................... ७२२
१४४- काशीकी गङ्गाके वरणा-सङ्गम, असी-सङ्गम तथा पञ्चगङ्गा आदि तीर्थोंका माहात्म्य ......................................... ६९४१५६- कुरुक्षेत्र-माहात्म्य ........................... ७२६
१४५- उत्कलदेशके पुरुषोत्तम-क्षेत्रकी महिमा, राजा इन्द्रद्युम्नका वहाँ जाकर मोक्ष प्राप्त करना ............................................ ६९५१५७- कुरुक्षेत्रके वन, नदी और भिन्न-भिन्न तीर्थोंका माहात्म्य तथा यात्राविधिका क्रमिक वर्णन ................................... ७२७
१४६- राजा इन्द्रद्युम्नके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति ............................................. ६९६१५८- गङ्गाद्वार (हरिद्वार) और वहाँके विभिन्न तीर्थोंका माहात्म्य ........................... ७३२
१४७- राजाको स्वप्नमें और प्रत्यक्ष भी भगवान्‌के दर्शन तथा भगवत्प्रतिमाओंका निर्माण, वर-प्राप्ति और प्रतिष्ठा .................... ६९८१५९- बदरिकाश्रमके विभिन्न तीर्थोंकी महिमा . ७३३
१४८- पुरुषोत्तमक्षेत्रकी यात्राका समय, मार्कण्डेयेश्वर शिव, वट-वृक्ष, श्रीकृष्ण,१६०- सिद्धनाथ-चरित्रसहित कामाक्षा-माहात्म्य ७३६
१६१- प्रभासक्षेत्रका माहात्म्य तथा उसके अवान्तर तीर्थोंकी महिमा ................................. ७३७