संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished770 पृष्ठ
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चित्र-सूची
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| इकरंगे ( लाइन ) | २७- अतिथि-सत्कार ............................. | ११६ | |
| १- नैमिषारण्यमें सूतजी महर्षियोंको कथा सुना रहे हैं.................................. | १९ | २८- श्राद्धमें निमन्त्रित ब्राह्मणका पूजन ........ | ११९ |
| २९- ग्रहणके समय जप करना चाहिये........ | १२३ | ||
| २- नारदजी और सनकादि कुमार प्रार्थना कर रहे हैं ................................. | २२ | ३०- प्रायश्चित्त ................................. | १२७ |
| ३- श्रीनारायणके अङ्गोंसे त्रिदेवोंका प्रादुर्भाव . | २५ | ३१- विष्णु-पूजनसे सर्वपाप-नाशपूर्वक भगवत्प्राप्ति................................ | १२९ |
| ४- मृकण्डु ऋषिको भगवद्दर्शन ............. | ३३ | ३२- पापियोंके नरकका मार्ग .................... | १३१ |
| ५- मार्कण्डेयका भगवान्को प्रणाम ........... | ३५ | ३३- पुण्यात्माओंका मार्ग ....................... | १३२ |
| ६- गङ्गा और गायत्री.......................... | ४१ | ३४- सभी अवस्थाओंमें दुःख................... | १३६ |
| ७- राजा बाहुकी पत्नीको और्व मुनिका सती होनेसे रोकना ............................... | ४३ | ३५- सबमें भगवान्.............................. | १३९ |
| ३६- प्रणवमें भगवान्............................ | १४४ | ||
| ८- कपिलके नेत्रानलसे सगरपुत्र भस्म हो गये ............................... | ४९ | ३७- हाथ, पैर, नेत्र आदिकी सफलता ........ | १४५ |
| ३८- जानन्ति और वेदमाली .................... | १५० | ||
| ९- दैत्योंकी लगायी आगसे सुदर्शनचक्रद्वारा अदितिकी रक्षा............................. | ५१ | ३९- महर्षि उत्तङ्क और गुलिक ................ | १५३ |
| १०- अदितिको भगवान्के द्वारा माला-दान ..... | ५५ | ४०- उत्तङ्कको भगवद्दर्शन ..................... | १५८ |
| ११- वामनजीका बलिसे भूमि माँगना .......... | ५७ | ४१- परिक्रमा................................... | १६० |
| १२- धर्मराज और भगीरथ...................... | ६१ | ४२- इन्द्र और सुधर्म ........................... | १६१ |
| १३- विष्णु, शिव आदिकी सेवासे भगवत्प्राप्ति | ६२ | ४३- चारों युगोंके साधन ....................... | १६७ |
| १४- नरक-यन्त्रणा ............................. | ७६ | ४४- चारों आश्रम................................ | १७१ |
| १५- पापनाशक उपाय ......................... | ८१ | ४५- शरीरादिकी रथरूपमें कल्पना............. | १७५ |
| १६- महर्षि भृगुके आश्रममें भगीरथ............ | ८६ | ४६- मुनि पञ्चशिख और राजा जनक ......... | १७८ |
| १७- भगीरथको शिव-दर्शन..................... | ८८ | ४७- केशिध्वज और खाण्डिक्य ................ | १८५ |
| १८- पूजन, ब्राह्मण-भोजन, फलादि-दान........ | ९३ | ४८- भगवान् विष्णु.............................. | १९१ |
| १९- श्रीलक्ष्मी-नारायण-पूजन, हवन............. | ९३ | ४९- राजा भरत और मृग-शिशु............... | १९३ |
| २०- ध्वजारोपण................................ | ९५ | ५०- जड़भरत और राजा रहूगण .............. | १९७ |
| २१- दीपदान ................................... | ९९ | ५१- निदाघ और ऋभु.......................... | २०० |
| २२- भद्रशीलके द्वारा खेलमें भगवत्पूजन ..... | १०१ | ५२- सर्वग्रास चन्द्रग्रहणका दृश्य ............. | २०२ |
| २३- ब्राह्मणके कर्म........................... | १०५ | ५३- खण्ड सूर्यग्रहणका दृश्य.................. | २०३ |
| २४- गुरुके चरणोंमें नमस्कार ................. | १०८ | ५४- सूर्यग्रहण ................................. | २०३ |
| २५- किस-किस समय शिखा खुली न रहे . | ११० | ५५- पञ्चशलाकाचक्र ........................... | ३७० |
| २६- त्रिकाल गायत्रीका ध्यान ................ | ११४ | ५६- शुकदेवजी राजा जनकके द्वारपर ........ | ४०८ |
| ५७- शुकदेवजी जनकके प्रमोदावनमें.......... | ४०८ |