भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

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पृष्ठ 266

२६४ * संक्षिप्त नारदपुराण *


द्विगुणेनामुना भक्ते फलं मूले न्यसेत् क्रमात्।
तत्कृतिं च त्यजेद्विप्र मूलेन विभजेत् पुनः॥ १७॥
एवं मुहुर्वर्गमूलं जायते च मुनीश्वर।
दो समान अङ्कोंके गुणनफलको वर्ग कहा गया है। विद्वान् पुरुष उसीको कृति कहते हैं। (जैसे ४ का वर्ग ४×४ = १६ और ९ का वर्ग ९×९=८१ होता है)¹ [वर्गमूल जाननेके लिये दाहिने अङ्कसे लेकर बायें अङ्कतक अर्थात् आदिसे अन्ततक विषम और समका चिह्न कर देना चाहिये। खड़ी लकीरको विषमका और पड़ीको समका चिह्न माना गया है]। अन्तिम विषममें जितने वर्ग घट सकें उतने घटा देना चाहिये। उस वर्गका मूल लेना और उसे पृथक् रख देना चाहिये॥ १६॥ फिर द्विगुणित मूलसे सम अङ्कमें भाग दे और जो लब्धि आवे उसका वर्ग विषममें घटा दे, फिर उसे दूना करके पङ्क्तिमें रख दे। मुनीश्वर! इस प्रकार बार-बार करनेसे पङ्क्तिका आधा वर्गमूल² होता है॥ १७\frac{१}{२}॥

समत्र्यङ्कहतिः प्रोक्तो घनस्तत्र विधिः पदे॥ १८॥
प्रोच्यते विषमं त्वाद्यं समे द्वे च ततः परम्।
विशोध्यं विषमादन्त्याद्घनं तन्मूलमुच्यते॥ १९॥
त्रिन्घ्न्याप्तं मूलकृत्या समं मूले न्यसेत् फलम्।
तत्कृतिघ्नान्त्यनिहतान्त्रिघ्नीं चापि विशोधयेत्॥ २०॥
घनं च विषमादेवं घनमूलं मुहुर्भवेत्।
समान तीन अङ्कोंके गुणनफलको 'घन'³ कहा गया है। अब घनमूल निकालनेकी विधि बतायी जाती है—दाहिनेके प्रथम अङ्कपर घन या विषमका चिह्न (खड़ी लकीरके रूपमें) लगावे, उसके वामभागमें पार्श्ववर्ती दो अङ्कोंपर (पड़ी लकीरके रूपमें) अघन या समका चिह्न लगावे। इसी प्रकार अन्तिम अङ्कतक एक घन (विषम) और दो अघन (सम)-के चिह्न लगाने चाहिये। अन्तिम या विषम घनमें जितने घन घट सकें उतने घटा दे। उस घनको अलग रखें। उसका घनमूल ले और उस घनमूलका वर्ग करे, फिर उसमें तीनसे गुणा करे। उससे आदि अङ्कमें भाग दे, लब्धिको अलग लिख ले, उस लब्धिका वर्ग करे और उसमें अन्त्य (प्रथम मूलाङ्क) एवं तीनसे गुणा करे, फिर उसके बादके अङ्कमें उसे घटा दे तथा अलग रखी हुई लब्धिके घनको


१. वर्ग या कृति निकालनेके और भी बहुत-से प्रकार लीलावतीमें दिये गये हैं।
२. जैसे १६३८४ का वर्गमूल उपर्युक्त विधिसे निकालनेपर १२८ आता है—

  |  _  |
१६३ ८४
१           १२८
---        ----
×६          २५६ पंक्ति
 ४
---
 २३          अङ्कोंको स्थापनकर दायेंसे बायें
  ४          तरफ खड़ी-पड़ी रेखा देकर विषम-
---          सम अङ्क समझना चाहिये।
 १९८
 १९२
 ---
  ६४
  ६४
 ---
   ×

३. जैसे ३ का घन हुआ ३×३×३=२७।