संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 267, कुल 770 में से
संदर्भ में पढ़ें- पूर्वभाग-द्वितीय पाद * २६५
अगले घन अङ्कमें घटा दे, इस प्रकार बार-बार करनेसे घनमूल¹ सिद्ध होता है॥१८–२० ॥
अन्योन्यहारनिहतौ हरांशौ तु समच्छिदा॥२१॥ लवा लवघ्नाश्च हरा हरघ्ना हि सवर्णनम्। भागप्रभागे विज्ञेयं मुने शास्त्रार्थचिन्तकैः॥२२॥ अनुबन्धेऽपवाहे चैकस्य चेदधिकोनकः। भागास्तलस्थहारेण हारं स्वांशाधिकेन तान्॥२३॥ ऊनेन चापि गुणयेद्धनर्णं चिन्तयेत् तथा। कार्यस्तुल्यहरांशानां योगश्चाप्यन्तरो मुने॥२४॥ अहारराशौ रूपं तु कल्पयेद्धरमप्यथ। अंशाहतिश्छेदघातहृद्भिन्नांगुणने फलम्॥२५॥ छेदं चापि लवं विद्वन् परिवर्त्य हरस्य च। शेषः कार्यो भागहारे कर्तव्यो गुणनाविधिः॥२६॥
भिन्न अङ्कोंके परस्पर हरसे हर (भाजक) और अंश (भाज्य) दोनोंको गुण देनेसे सबके नीचे बराबर हर² हो जाता है। भागप्रभागमें अंशको अंशसे और हरको हरसे गुणा करना चाहिये। भागानुबन्ध एवं भागापवाहमें³ यदि एक अङ्क अपने अंशसे अधिक या ऊन होवे तो तलस्थ हरसे ऊपरवाले हरको गुण देना चाहिये। उसके बाद अपने अंशसे अधिक ऊन किये हुए हरसे (अर्थात् भागानुबन्धमें हर अंशका योग करके और भागापवाहमें हर अंशका अन्तर करके) अंशको गुण देना चाहिये। ऐसा करनेसे भागानुबन्ध और भागापवाहका फल सिद्ध होगा⁴। जिसके नीचे हर न हो उसके नीचे एक हरकी कल्पना करनी चाहिये। भिन्न गुणन-साधनमें अंश-अंशका गुणन करना और हर-हरके गुणनसे भाग देना चाहिये। इससे भिन्न गुणनमें फलकी सिद्धि होगी। (यथा २/७×३/८ यहाँ २ और ३ अंश हैं और ७, ८ हर हैं, इनमें अंश-अंशसे गुणा करनेपर २×३=६ हुआ और हर-हरके गुणनसे ७×८=५६ हुआ।
१. उदाहरण इस प्रकार है—
१९६८३ का घनमूल निकालना है। मूलोक्त विधिके अनुसार इसकी क्रिया इस प्रकार होगी—
$\begin{array}{rll} & १'९६'८'३' & \ & \underline{\phantom{१'}८\phantom{'८'३'}} & ) ८ घन, उसका मूल २ ( \ २\times २\times ३= & १२) ११६ (२७ = घनमूल & २ का वर्ग = ४ \ & \phantom{१२)}\underline{\phantom{१}८४} & ४ \times ३ = १२ \ & \phantom{१२)}३२८ & ७ का वर्ग ४९ \ ७\times ७\times २\times ३ & \phantom{१२)}\underline{२९४} & ४९ \times २ = ९८ \ & \phantom{१२)}३४३ & ९८ \times ३ = २९४ \ ७\times ७\times ७= & \phantom{१२)}\underline{३४३} & \ & \phantom{१२)}००० & \end{array}
२. यथा— \frac{१}{२}, \frac{१}{३}, \frac{१}{४} यहाँ परस्पर हरसे हर और अंश दोनोंको गुणित किया जाता है। जिस हरसे गुणा करते हैं, वह अपने सिवा दूसरे हर और अंशको ही गुणित करता है। जैसे—
| \frac{१}{२}, | \frac{१}{३}, | \frac{१}{४} |
|---|---|---|
| \frac{३}{६}, | \frac{२}{६}, | |
| \frac{१२}{२४} | \frac{८}{२४} | \frac{६}{२४} |
इस प्रकार यहाँ सबका हर समान हो गया। ऐसा करके ही भिन्नाङ्कोंका योग या अन्तर किया जाता है। यथा—
\frac{१}{२}+\frac{१}{३}+\frac{१}{४} = \frac{१२+८+६}{२४} = \frac{२६}{२४} \ \frac{१३}{१२}
३. किसी भागको जोड़नेको भागानुबन्ध और घटानेको भागापवाह कहते हैं।
४. उदाहरणके लिये यह प्रश्न है—१/८ का १/३ उसमेंसे घटाओ और शेषका १/२ उसी शेषमें जोड़ो, इसकी न्यास-विधि (लिखनेकी रीति) इस प्रकार होगी—
\begin{array}{l} \phantom{+} १/८ \ \phantom{+} १/३ \
- १/२ \end{array}
\frac{१\times ३\times २}{८\times २\times ३} = \frac{१}{८} उत्तर हुआ।$