भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

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२७० * संक्षिप्त नारदपुराण *


प्रमाण धनसे अपने-अपने कालको गुणा करना, उसमें अपने-अपने व्यतीत काल और फलके घात (गुणा)-से भाग देना, लब्धिको पृथक् रहने देना, उन सबमें उन्हींके योगका पृथक्-पृथक् भाग देना तथा सबको मिश्रधनसे गुणा कर देना चाहिये। फिर क्रमसे प्रयुक्त व्यापारमें लगाये हुए धनखण्डके प्रमाण ज्ञात होते हैं^१॥ ३९ \frac{१}{२} ॥

बहुराशिफलात् स्वल्पराशिमासफलं बहु ॥ ४० ॥
चेद्राशिजफलं मासफलाहितहतं चयः।

पञ्चराशिकादिमें फल और हरको अन्योन्य पक्षनयन करनेसे इच्छा-पक्षमें फलके चले जानेसे इच्छापक्ष बहुराशि और प्रमाण-पक्ष स्वल्पराशि माना गया है। इसी गणितके उदाहरणमें जब इच्छाफल जानकर मूलधन जानना होगा तो फलोंको परस्पर पक्षमें परिवर्तन करनेसे प्रमाण-पक्ष (स्वल्पराशि) का फल ही बहुराशि (इच्छापक्ष)-से अधिक होगा। यहाँ राशिजफलको इष्टमास और प्रमाण-फलके गुणनसे भाग देनेपर मूलधन होता है^२॥ ४० \frac{१}{२} ॥

क्षेपा मिश्रहताः क्षेपयोगभक्ताः फलानि च ॥ ४१ ॥
भजेच्छिदोंऽशैस्तैर्मिश्रै रूपं कालश्च पूर्तिकृत् ।

प्रक्षेप (पूँजीके टुकड़े)-को पृथक्-पृथक् मिश्रधनसे गुण देना और उसमें प्रक्षेपके योगसे भाग देना चाहिये। इससे पृथक्-पृथक् फल ज्ञात


१. कल्पित ब्याज हुआ। कल्पित मिश्रधन ५+३=८, इससे इष्टगुणित दृश्यमें भाग देनेसे उद्दिष्ट मूलधन १०००×५=६२५) इसको मिश्रधन १००० में घटानेसे ३७५) ब्याजके हुए। संक्षेपसे इस प्रकार न्यास करना चाहिये—

\frac{८}{५} ११२लब्धिक्रमसे मूल ६२५)
१००१०००ब्याज ३७५)

अथवा इष्टकर्मसे कल्पित इष्ट १
पूर्वोक्त रीतिसे कलान्तर (सूद) ३/५ इससे युक्त १=८/५
१००० ÷ \frac{८}{५} = \frac{१०००\times ५}{८} = ६२५) मूलधन
१०००-६२५=३७५) ब्याज

२. उदाहरणके लिये यह प्रश्न है—किसीने अपने ९४) रुपये मूलधनके तीन भाग करके एक भागको माहवारी पाँच रुपये सैकड़े ब्याज, दूसरे भागको तीन रुपये और तीसरे भागको चार रुपये सैकड़े ब्याजपर दिया। क्रमशः तीनों भागोंमें सात, दस और पाँच मासमें बराबर ब्याज मिले तो तीनों भागोंकी अलग-अलग संख्या बताओ।

भाग १भाग २भाग ३मिश्रधन (सम्मिलित मूलधन) ९४
प्रमाणकाल १ व्यतीतकाल ७प्र०का०१ व्य०का०१०प्र० का० १ व्य० का० ५
प्रमाण धन १००प्रमाण धन १००प्रमाण धन १००
प्रमाण फल ५प्रमाण फल ३प्रमाण फल ४

अपने प्रमाणकाल और प्रमाणधनके गुणनफलमें व्यतीतकाल और प्रमाण-फलके गुणनफलसे भाग देनेपर—

\frac{१००\times १ = १००}{७\times ५ = ३५} = \frac{२०}{७} | \frac{१००\times १}{३\times १०} = \frac{१००}{३०} = \frac{१०}{३} | \frac{१००\times १}{४\times ५} = \frac{१००}{२०} = \frac{५}{१}

इनमें इनके योग २३५/२१ से भाग देने और मिश्रधन (९४)-से गुणा करनेपर पृथक्-पृथक् भाग इस प्रकार होते हैं—

\frac{२०}{७} \div \frac{२३५}{२१} = \frac{२०\times २१\times ९४}{७\times २३५} = २४ यह प्रथम भाग हुआ।
\frac{१०}{३} \div \frac{२३५}{२१} = \frac{१०\times २१\times ९४}{३\times २३५} = २८ यह द्वितीय भाग हुआ।
\frac{५}{१} \div \frac{२३५}{२१} = \frac{५\times २१\times ९४}{१\times २३५} = ४२ यह तृतीय भाग हुआ।

२. उदाहरण—एक मासमें १००) मूलधनका ५) रुपया ब्याज होता है तो १२ मासमें १६ रुपयेका कितना होगा?

उत्तरार्थ न्यास—

प्रमाणइच्छा
१२
१००१६
x

अन्योन्य पक्षनयनसे

स्वल्प राशिबहुराशि
१२
१००१६