संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 273, कुल 770 में से
संदर्भ में पढ़ें- पूर्वभाग-द्वितीय पाद * | २७१ ---|---:
| होते हैं।¹ वापी आदि पूरणके प्रश्नमें—अपने-अपने अंशोंसे हरमें भाग देना, फिर उन सबके योगसे १ में भाग देनेपर वापीके भरनेके समयका ज्ञान होता है² ॥ ४१ १/२ ॥ | उसमें १ घटाकर गुणक लिखे। यदि पद सम हो तो आधा करके वर्गचिह्न लिखे। इस प्रकार एक घटाने और आधा करनेमें भी जब विषमाङ्क हो तब गुणकचिह्न, जब समाङ्क हो तब वर्गचिह्न करना एवं जबतक पदकी कुल संख्या समाप्त न हो जाय तबतक करते रहना चाहिये। फिर अन्त्य चिह्नसे उलटा गुणज और वर्गफल साधन करके आद्य चिह्नतक जो फल हो, उसमें १ घटाकर शेषमें एकोन गुणकसे भाग देना चाहिये। लब्धिको आदि अङ्कसे गुणा करनेपर |
| गुणो गच्छेऽसमे व्येके समे वर्गोऽर्धितेऽन्ततः ॥ ४२ ॥<br>यद् गच्छान्तफलं व्यस्तं गुणवर्गभवं हि तत्।<br>व्येकं व्येकगुणाप्तं च प्राग्घ्नं मानं गुणोत्तरे ॥ ४३ ॥ | |
| (द्विगुणचयादि-वृद्धिमें फलका साधन)—<br>(जहाँ द्विगुण-त्रिगुण आदि चय हो वहाँ) पद यदि विषम संख्या (३, ५, ७ आदि) हो तो |
श्लोकोक्त रीतिके अनुसार— \frac{१२\times१६\times५}{१००} = \frac{४८}{५} = इच्छाफल।
इसी उदाहरणमें मूलधन जाननेके लिये—
न्यास—
| प्रमाण-पक्ष | इच्छा-पक्ष |
|---|---|
| मास १ | १२ मास |
| धनराशि १०० | x |
| फल ५ | \frac{४८}{५}=इच्छाफल (५ वीं राशि) |
यहाँ फल और हरके अन्योन्य पक्षनयन करनेसे—
| बहुराशि | स्वल्पराशि |
|---|---|
| प्रमाण | इच्छा |
| मास १ | १२ |
| धन १०० | x |
| ४८ | ५ |
| ५ |
'बहुराशिपलात्' इत्यादि ४० वें श्लोकके अनुसार—
\frac{१\times१००\times४८}{१२\times५\times५} = १६ = मूलधन।
१. मान लीजिये कि ३ व्यापारियोंके क्रमसे ५१, ६८, ८५ रुपये मूलधन हैं। तीनोंने एक साथ मिलकर व्यापारसे ३००) रुपये प्राप्त किये तो इन तीनोंके पृथक्-पृथक् कितने धन होंगे? यहाँ मूलोक्त नियमके अनुसार प्रक्षेपों (५१, ६८, ८५)-को मिश्रधन ३०० से गुणाकर प्रक्षेपोंके योग २०४ के द्वारा भाग देनेपर लब्धिक्रमसे तीनोंके पृथक्-पृथक् भाग हुए।
यथा—प्रथमका
भाग=\frac{५१\times३००}{२०४}=७५। द्वितीयका भाग=\frac{६८\times३००}{२०४}=१००। तृतीयका भाग=\frac{८५\times३००}{२०४}=१२५।
२. कल्पना कीजिये कि एक झरना या नल किसी तालाबको १ दिन (१२ घंटे) में, दूसरा १/२ दिनमें, तीसरा १/३ दिनमें और चौथा १/६ दिनमें अलग-अलग खोलनेपर भर देता है तो यदि चारों एक ही साथ खोल दिये जायें तो दिनके कितने भागमें तालाबको भरेंगे।
मूलोक्त रीतिसे अपने-अपने अंशसे हरमें भाग देनेसे १/१, २/१, ३/१, ६/१, इनके योग १२/१ से १ में भाग देनेपर १/१२ हुआ। अर्थात् १ दिनके १२ वें भागमें (१ घंटेमें) तालाब भर जायगा।