संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 292, कुल 770 में से
संदर्भ में पढ़ें२९० * संक्षिप्त नारदपुराण *
त्रिभद्युकर्णादर्द्धगुणाः स्वाहोरात्रार्द्धभाजिताः। क्रमादेकद्वित्रिभज्यास्तच्चापानि पृथक् पृथक्॥ १४२॥ स्वाधोऽधः प्रविशोध्याथ मेषाल्लङ्कोदयासवः। खागाष्टयोऽर्थगोऽगैकाः शरत्र्यङ्केहिमांशवः॥ १४३॥ स्वदेशचरखण्डोना भवन्तीष्टोदयासवः। व्यस्ता व्यस्तैर्युताः स्वैः स्वैः कर्कटाद्यास्ततस्त्रयः॥ १४४॥ उत्क्रमेण षडेवैते भवन्तीष्टास्तुलादयः।
राशियोंके उदयमान— १ राशि, २ राशि, ३ राशिकी ज्याको पृथक्-पृथक् 'परमाल्पद्युज्या' (परमक्रान्तिकी कोटिज्या)-से गुणा करके उसमें अपनी-अपनी द्युज्या (क्रान्तिकोटिज्या) से भाग देकर लब्धियोंके चाप बनावे। उनमें प्रथम चाप मेषका उदय (लङ्कोदय)-मान होता है। प्रथम चापको द्वितीय चापमें घटानेपर शेष वृषका उदयमान होता है एवं द्वितीय चापको तृतीय चापमें घटाकर जो शेष रहे, वह मिथुनका लङ्कोदयमान होता है। यथा—१६७० असु मेषका, १७९५ वृषका तथा १९३५ मिथुनका सिद्ध लङ्कोदयमान हैं। इन तीनोंमें क्रमसे अपने देशीय तीनों चरखण्डोंको घटावे तो क्रमशः तीनों अपने देशके मेष आदि तीन राशियोंके उदयमान होते हैं। पुनः उन्हीं तीनों लङ्कोदयमानोंको उत्क्रमसे रखकर—इन तीनोंमें अपने देशके तीनों चरखण्डोंको उत्क्रमसे जोड़नेपर कर्क आदि ३ राशियोंके स्वदेशोदयमान होते हैं एवं मेषादि कन्यापर्यन्त ६ राशियोंके उदयमान सिद्ध होते हैं। पुनः ये ही उत्क्रमसे तुलादि ६ राशियोंके मान होते हैं॥ १४२—१४४ १/२ ॥
गतभोग्यासवः कार्याः सायनात् स्वेष्टभास्करात्॥ १४५॥
अहोरात्र ७ पल अधिक हुआ। इसी प्रकार सब ग्रहोंके अहोरात्रमान समझे। १. राशियोंके लङ्कोदयमान-साधनका उदाहरण—एक राशि (१८०० कला)-की ज्या १७१९ उसकी द्युज्या ३३५१ तथा परमाल्पद्युज्या ३१३९ कला है तो एक राशिज्या १७१९ को परमाल्पद्युज्या ३१३९ से गुणा करके गुणनफल ५३९५९४१ में एक राशिकी द्युज्या ३३५१ से भाग देकर लब्धि एक राशि उदयज्या १६१० हुई। इसका चाप मेषका उदयासु स्वल्पान्तरसे १६७० हुआ। इसी प्रकार आगे अपनी-अपनी ज्या और द्युज्यासे साधन करके राशियोंके उदयासु लिखे गये हैं। यथा—
| लङ्कोदयासु | चरासु | स्वदेशोदयासु | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| मेष | १६७० | - | ३६० | = | १३१० | मीन |
| वृष | १७९५ | - | २८८ | = | १५०७ | कुम्भ |
| मिथुन | १९३५ | - | १२० | = | १८१५ | मकर |
| कर्क | २९३५ | + | १२० | = | ३०५५ | धनु |
| सिंह | १७९५ | + | २८८ | = | २०८३ | वृश्चिक |
| कन्या | १६७० | + | ३६० | = | २०३० | तुला |
ये उदयमान अनुसंख्यामें हैं। इनमें ६ के भाग देनेसे पलात्मक होते हैं। यथा—मेषोदयासू = १६७०, अतः मेषोदयपल = १६७०/६ = २७८ स्वल्पान्तरसे। एवं अन्य मान निम्नाङ्कित चित्रमें देखिये। २. उदाहरण—पलमान ६ हैं, वहाँ चरखण्ड-क्रमसे पलात्मक ६०। ४८। २० हुए। इनको क्रम-उत्क्रमसे पलात्मक लङ्कोदयमें घटाने और जोड़नेसे ६ पलभादेशीय (स्वदेशोदय)-मान हुए। चक्रमें देखिये—
| लङ्कोदया | चरखण्ड | स्वदेशोदया | ||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| मे. | २७८ | - | ६० | = | २१८ | मी. |
| वृ. | २९९ | - | ४८ | = | २५१ | कुं. |
| मि. | ३२३ | - | २० | = | ३०३ | म. |
| क. | ३२३ | + | २० | = | ३४३ | ध. |
| सि. | २९९ | + | ४८ | = | ३४७ | वृ. |
| क. | २७८ | + | ६० | = | ३३८ | तु. |