भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

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पृष्ठ 516
५१४* संक्षिप्त नारदपुराण *

६१२. कल्पद्रुमतलाविष्टा = कल्पवृक्षके नीचे बैठी हुई, ६१३. कृष्णा = कृष्णस्वरूपा, ६१४. विश्वा = विश्वस्वरूपा, ६१५. हरिप्रिया = श्रीकृष्णकी प्रेयसी, ६१६. अजागम्या = ब्रह्माजीके लिये अगम्य, ६१७. भवागम्या = महादेवजीके लिये अगम्य, ६१८. गोवर्धनकृतालया = गोवर्धन पर्वतपर निवास करनेवाली।

६१९. यमुनातीरनिलया = यमुना तटपर रहनेवाली, ६२०. शश्वद्गोविन्दजल्पिनी = सदा श्रीकृष्ण गोविन्दकी रट लगानेवाली, ६२१. शश्वन्मानवती = नित्य मानिनी, ६२२. स्निग्धा = स्नेहमयी, ६२३. श्रीकृष्णपरिवन्दिता = श्रीकृष्णके द्वारा नित्य वन्दित।

६२४. कृष्णस्तुता = श्रीकृष्णके द्वारा जिनका गुणगान किया गया है, ६२५. कृष्णाव्रता = श्रीकृष्णपरायणा, ६२६. श्रीकृष्णहृदयालया = श्रीकृष्णके हृदयमें निवास करनेवाली, ६२७. देवद्रुमफला = कल्पवृक्षके समान मनोवाञ्छित फल देनेवाली, ६२८. सेव्या = सेवन करने योग्य, ६२९. वृन्दावनरसालया = वृन्दावनके रसमें निमग्न रहनेवाली।

६३०. कोटितीर्थमयी = कोटितीर्थस्वरूपा, ६३१. सत्या = सत्यस्वरूपा, ६३२. कोटितीर्थफलप्रदा = करोड़ों तीर्थोंका फल देनेवाली, ६३३. कोटियोग-सुदुष्प्राप्या = करोड़ों योगसाधनोंसे भी दुर्लभ, ६३४. कोटियज्ञदुराश्रया = कोटि यज्ञोंसे भी जिनकी शरणागति प्राप्त होनी कठिन है।

६३५. मनसा = मनसा नामसे प्रसिद्ध, ६३६. शशिलेखा = श्रीकृष्णरूपी चन्द्रमाकी कला, ६३७. श्रीकोटिसुभगा = कोटि लक्ष्मीके समान सौभाग्यवती, ६३८. अनघा = पापशून्य, ६३९. कोटिमुक्तसुखा = करोड़ों मुक्तात्माओंके समान सुखी, ६४०. सौम्या = सौम्यस्वरूपा, ६४१. लक्ष्मीकोटिविलासिनी = करोड़ों लक्ष्मियोंके समान विलासवती।

६४२. तिलोत्तमा = ठोढ़ीमें तिलके आकारकी बेंदी या चिह्न होनेके कारण अतिशय उत्तम सौन्दर्ययुक्त, ६४३. त्रिकालस्था = भूत, भविष्य, वर्तमान—तीनों कालोंमें विद्यमान, ६४४. त्रिकालज्ञा = तीनों कालोंकी घटनाओंको जाननेवाली, ६४५. अधीश्वरी = स्वामिनी, ६४६. त्रिवेदज्ञा = तीनों वेदोंको जाननेवाली, ६४७. त्रिलोकज्ञा = तीनों लोकोंको जाननेवाली, ६४८. तुरीयान्तनिवासिनी = जाग्रत्‌से लेकर तुरीयापर्यन्त सब अवस्थाओंमें निवास करनेवाली।

६४९. दुर्गाराध्या = उमाके द्वारा आराध्य, ६५०. रमाराध्या = लक्ष्मीकी आराध्य देवी, ६५१. विश्वाराध्या = सम्पूर्ण जगत्‌के लिये आराधनीया, ६५२. चिदात्मिका = चेतनस्वरूपा, ६५३. देवाराध्या = देवताओंकी आराध्य देवी, ६५४. पराराध्या = परम आराध्य देवी, ६५५. ब्रह्माराध्या = ब्रह्माजीके द्वारा उपास्य, ६५६. परात्मिका = परमात्मस्वरूपा।

६५७. शिवाराध्या = भगवान् शिवके लिये आराध्य, ६५८. प्रेमसाध्या = प्रेमसे प्राप्त होने योग्य, ६५९. भक्ताराध्या = भक्तोंकी उपास्य देवी, ६६०. रसात्मिका = रसस्वरूपा, ६६१. कृष्णप्राणार्पिणी = श्रीकृष्णको जीवन देनेवाली, ६६२. भामा = मानिनी, ६६३. शुद्धप्रेमविलासिनी = विशुद्ध प्रेमसे सुशोभित होनेवाली।

६६४. कृष्णाराध्या = श्रीकृष्णकी आराध्य देवी, ६६५. भक्तिसाध्या = अनन्य भक्तिसे प्राप्त होनेवाली, ६६६. भक्तवृन्दनिषेविता = भक्त-समुदायसे सेविता, ६६७. विश्वाधारा = सम्पूर्ण जगत्‌को आश्रय देनेवाली, ६६८. कृपाधारा = कृपाकी आधारभूमि, ६६९. जीवाधारा = सम्पूर्ण जीवोंको आश्रय देनेवाली, ६७०. अतिनायिका = सम्पूर्ण नायिकाओंसे उत्कृष्ट।

६७१. शुद्धप्रेममयी = विशुद्ध अनुरागस्वरूपा, ६७२. लज्जा = मूर्तिमती लज्जा, ६७३. नित्यसिद्धा-