संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 520, कुल 770 में से
संदर्भ में पढ़ें५९८ * संक्षिप्त नारदपुराण *
कीर्तिमती, ८४५. वैराजसूर्यजननी=विराट् ब्रह्माण्डके प्रकाशक सूर्यको जन्म देनेवाली, ८४६. श्रीशा=लक्ष्मीकी भी स्वामिनी, ८४७. भुवनमोहिनी=सम्पूर्ण भुवनोंको मोहित करनेवाली।
८४८. महाशोभा=परम शोभाशालिनी, ८४९. महामाया=महामायास्वरूपा, ८५०. महाकान्तिः=अनन्त कान्तिसे सुशोभित, ८५१. महास्मृतिः=महती स्मरणशक्तिस्वरूपा, ८५२. महामोहा=महामोहमयी, ८५३. महाविद्या=भगवत्प्राप्ति करानेवाली श्रेष्ठ विद्या, ८५४. महाकीर्तिः=विशाल कीर्तिवाली, ८५५. महारतिः=अत्यन्तानुरागस्वरूपा।
८५६. महाधैर्या=अत्यन्त धीर स्वभाववाली, ८५७. महावीर्या=महान् पराक्रमसे सम्पन्न, ८५७. महाशक्तिः=महाशक्ति, ८५९. महाद्युतिः=परम-प्रकाशवती, ८६०. महागौरी=अत्यन्त गौर वर्णवाली, ८६१. महासम्पत्=परम सम्पत्तिरूपा, ८६२. महाभोगविलासिनी=महान् भोग-विलाससे युक्त।
८६३. समया=अत्यन्त निकटवर्तिनी, ८६४. भक्तिदा=भक्ति देनेवाली, ८६५. अशोका=शोकरहित, ८६६. वात्सल्यरसदायिनी=वात्सल्यरस देनेवाली, ८६७. सुहृद्भक्तिप्रदा=सुहृद् जनोंको भक्ति देनेवाली, ८६८. स्वच्छा=निर्मल, ८६९. माधुर्यरसवर्षिणी= माधुर्यरसकी वर्षा करनेवाली।
८७०. भावभक्तिप्रदा=भावभक्ति प्रदान करनेवाली, ८७१. शुद्धप्रेमभक्तिविधायिनी=शुद्ध प्रेमलक्षणा भक्तिका विधान करनेवाली, ८७२. गोपरामा=गोपकुलकी रमणी, ८७३. अभिरामा=सर्व-सुन्दरी, ८७४. क्रीडारामा=श्यामसुन्दरके साथ लीलामें रत रहनेवाली, ८७५. परेश्वरी=परमेश्वरी।
८७६. नित्यरामा=नित्य वस्तुमें रमण करनेवाली, ८७७. आत्मरामा=आत्मामें रमण करनेवाली, ८७८. कृष्णरामा=श्रीकृष्णके चिन्तनमें रमण करनेवाली, ८७९. रमेश्वरी=लक्ष्मीकी अधीश्वरी, ८८०. एकानेकजगद्व्याप्ता=एक होकर भी अनेक रूपसे जगत्में व्याप्त, ८८१. विश्वलीलाप्रकाशिनी=सम्पूर्ण विश्वके रूपमें बाह्यलीलाको प्रकाशित करनेवाली।
८८२. सरस्वतीशा=सरस्वतीकी स्वामिनी, ८८३. दुर्गेशा=दुर्गाकी स्वामिनी, ८८४. जगदीशा=जगत्की स्वामिनी, ८८५. जगद्विधिः=संसारको रचनेवाली, ८८६. विष्णुवंशनिवासा=वैष्णववंशमें निवास करनेवाली, ८८७. विष्णुवंशसमुद्भवा=वैष्णववंशमें प्रकट हुई।
८८८. विष्णुवंशस्तुता=वैष्णवकुलके द्वारा स्तुत, ८८९. कर्त्री=स्वतन्त्र कर्तृत्वशक्तिसे सम्पन्न, ८९०. सदाविष्णुवंशावनी=सदा वैष्णवकुलकी रक्षा करनेवाली, ८९१. आरामस्था=उपवनमें रहनेवाली, ८९२. वनस्था=वृन्दावनमें निवास करनेवाली, ८९३. सूर्यपुत्र्यवगाहिनी=यमुनामें स्नान करनेवाली।
८९४. प्रीतिस्था=प्रेममें निवास करनेवाली, ८९५. नित्ययन्त्रस्था=नित्य-यन्त्रमें स्थित रहनेवाली, ८९६. गोलोकस्था=गोलोकधाममें स्थित, ८९७. विभूतिदा=ऐश्वर्य देनेवाली, ८९८. स्वानुभूतिस्थिता= केवल अपनी अनुभूतिमें प्रकट होनेवाली, ८९९. अव्यक्ता=अव्यक्तस्वरूपा, ९००. सर्वलोकनिवासिनी=सम्पूर्ण लोकोंमें निवास करनेवाली।
९०१. अमृता=अमृतस्वरूपा, ९०२. अद्भुता=अद्भुत रूप और भावसे सम्पन्न, ९०३. श्रीमन्नारायणसमीरिता=लक्ष्मीसहित भगवान् नारायणके द्वारा स्तुत, ९०४. अक्षरा= अक्षरस्वरूपा, ९०५. कूटस्था=एकरस परमात्मस्वरूपा, ९०६. महापुरुषसम्भवा=महापुरुषोंको प्रकट करनेवाली।
९०७. औदार्यभावसाध्या=औदार्यपूर्ण भक्तिभावसे