भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

पृष्ठ 519, कुल 770 में से

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पृष्ठ 519
* पूर्वभाग-तृतीय पाद *५१७

धारण करनेवाली, ७८९. स्वर्णभूषिता = सोनेके आभूषणोंसे विभूषित।

७९०. श्रीकृष्णहृदयावासा = श्रीकृष्णके हृदय-मन्दिरमें निवास करनेवाली, ७९१. मुक्ताकनकनासिका = नासिकामें मुक्तायुक्त सुवर्णके आभूषण धारण करनेवाली, ७९२. सद्रत्नकङ्कणयुता = हाथोंमें सुन्दर रत्नजटित कंगन पहननेवाली, ७९३. श्रीमन्नीलगिरिस्थिता = शोभाशाली नीलाचलपर विराजमान।

७९४. स्वर्णनूपुरसम्पन्ना = सोनेके नूपुरोंसे सुशोभित, ७९५. स्वर्णकिङ्किणिमण्डिता = सुवर्णकी किङ्किणी (करधनी)-से अलंकृत, ७९६. अशेषरासकुतुका = महाराजके लिये उत्कण्ठित रहनेवाली, ७९७. रम्भोरुः = केलेके समान जंघावाली, ७९८. तनुमध्यमा = क्षीण कटिवाली।

७९९. पराकृतिः = सर्वोत्कृष्ट आकृतिवाली, ८००. परानन्दा = परमानन्दस्वरूपा, ८०१. परस्वर्ग-विहारिणी = स्वर्गसे भी परे गोलोक धाममें विहार करनेवाली, ८०२. प्रसूनकबरी = वेणीमें फूलोंके हार गूँथनेवाली, ८०३. चित्रा = विचित्र शोभामयी, ८०४. महासिन्दूरसुन्दरी = उत्तम सिन्दूरसे अति सुन्दर प्रतीत होनेवाली।

८०५. कैशोरवयसा = किशोरावस्थासे युक्त, ८०६. बाला = मुग्धा, ८०७. प्रमदाकुलशेखरा = रमणीकुलशिरोमणि, ८०८. कृष्णाधरासुधास्वादा = श्रीकृष्णनामरूपी सुधाका अधरोंके द्वारा नित्य आस्वादन करनेवाली, ८०९. श्यामप्रेमविनोदिनी = श्रीकृष्णप्रेमसे ही मनोरञ्जन करनेवाली।

८१०. शिखिपिच्छलसच्चूडा = मयूर-पंखसे सुशोभित केशोंवाली, ८११. स्वर्णचम्पकभूषिता = स्वर्णचम्पाके आभूषणोंसे विभूषित, ८१२. कुङ्कुमालक्तकस्तूरीमण्डिता = रोली, महावर और कस्तूरीके शृङ्गारसे सुशोभित, ८१३. अपराजिता = कभी परास्त न होनेवाली।

८१४. हेमहारान्विता = सुवर्णके हारसे अलंकृत, ८१५. पुष्पहाराढ्या = पुष्पमालासे मण्डित, ८१६. रसवती = प्रेमरसमयी, ८१७. माधुर्यमधुरा = माधुर्य भावके कारण मधुर, ८१८. पद्मा = पद्मानामसे प्रसिद्ध, ८१९. पद्महस्ता = हाथमें कमल धारण करनेवाली, ८२०. सुविश्रुता = अति विख्यात।

८२१. भ्रूभङ्गाभङ्गकोदण्डकटाक्षसरसन्धिनी = श्रीकृष्णके प्रति तिरछी भौंहरूपी सुदृढ़ धनुषपर कटाक्षरूपी बाणोंका संधान करनेवाली, ८२२. शेषदेवशिरःस्था = शेषजीके मस्तकपर पृथ्वीके रूपमें स्थित, ८२३. नित्यस्थलविहारिणी = नित्य लीला-स्थलियोंमें विचरनेवाली।

८२४. कारुण्यजलमध्यस्था = करुणारूपी जलराशिके मध्य विराजमान, ८२५. नित्यमत्ता = सदा प्रेममें मतवाली, ८२६. अधिरोहिणी = उन्नतिकी साधनरूपा, ८२७. अष्टभाषावती = आठ भाषाओंको जाननेवाली, ८२८. अष्टनायिका = ललिता आदि आठ सखियोंकी स्वामिनी, ८२९. लक्षणान्विता = उत्तम लक्षणोंसे युक्त।

८३०. सुनीतिज्ञा = अच्छी नीतिको जाननेवाली, ८३१. श्रुतिज्ञा = श्रुतिको जाननेवाली, ८३२. सर्वज्ञा = सब कुछ जाननेवाली, ८३३. दुःखहारिणी = दुःखोंको हरण करनेवाली, ८३४. रजोगुणेश्वरी = रजोगुणकी स्वामिनी, ८३५. शरच्चन्द्रनिभानना = शरदृतुकी चन्द्रमाकी भाँति मनोहर मुखवाली।

८३६. केतकीकुसुमाभासा = केतकीके पुष्पकी-सी आभावाली, ८३७. सदासिन्धुवनस्थिता = सदा सिन्धु-वनमें रहनेवाली, ८३८. हेमपुष्पाधिककरा = सुवर्ण-पुष्पसे अधिक कमनीय हाथवाली, ८३९. पञ्चशक्तिमयी = पञ्चविधशक्तिसे सम्पन्न, ८४०. हिता = हितकारिणी।

८४१. स्तनकुम्भी = कुम्भके समान स्तनवाली, ८४२. नराख्या = पुरुषोत्तम श्रीकृष्णसे संयुक्त, ८४३. क्षीणापुण्या = पापरहित, ८४४. यशस्विनी =

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