संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 518, कुल 770 में से
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७३१. शुकाङ्किता=शुकके चिह्नसे युक्त, ७३२. कृष्णान्नआहारपाका=श्रीकृष्णको भोजन करानेके लिये भाँति-भाँतिकी रसोई तैयार करनेवाली, ७३३.वृन्दाकुञ्जविहारिणी=वृन्दावनके कुञ्जमें विचरनेवाली।
७३४.कृष्णप्रबोधनकरी=कृष्णको शयनसे जगानेवाली, ७३५. कृष्णशेषान्नभोजिनी=श्रीकृष्णके आरोगनेसे बचे हुए प्रसादरूप अन्नको ग्रहण करनेवाली, ७३६. पद्मकेसरमध्यस्था=कमलकेसरोंके मध्यमें विराजमान, ७३७. सङ्गीतागमवेदिनी=सङ्गीतशास्त्रको जाननेवाली।
७३८. कोटिकल्पान्तभूभङ्गा=अपने भ्रूभङ्गमात्रसे करोड़ों कल्पोंका अन्त करनेवाली, ७३९. अप्राप्तप्रलया=कभी प्रलयको प्राप्त न होनेवाली, ७४०. अच्युता=अपनी महिमासे कभी विचलित न होनेवाली, ७४१. सर्वसत्त्वनिधिः=पूर्ण सत्त्वगुणकी निधि, ७४२. पद्मशङ्खादिनिधिसेविता=पद्म-शङ्ख आदि निधियोंसे सेवित।
७४३.अणिमादिगुणैश्वर्या=अणिमा आदि अष्टविध गुणोंके ऐश्वर्योंसे युक्त, ७४४. देववृन्दविमोहिनी= देवसमुदायको मोहित करनेवाली, ७४५. सर्वानन्दप्रदा=सबको आनन्द देनेवाली, ७४६. सर्वा=सर्वस्वरूपा, ७४७.सुवर्णलतिकाकृतिः=स्वर्णमयी लताके समान आकृतिवाली।
७४८. कृष्णाभिसारसंकेता=श्रीकृष्णसे मिलनेके लिये संकेतस्थानमें स्थित, ७४९. मालिनी=मालासे अलंकृत, ७५०. नृत्यपण्डिता=नृत्यकलाकी विदुषी, ७५१. गोपीसिन्धुसकाशाप्या = गोपीसमुदायरूपी सिन्धुमें प्राप्त होनेवाली, ७५२. गोपमण्डपशोभिनी=वृषभानुगोपके मण्डपमें शोभा पानेवाली।
७५३. श्रीकृष्णप्रीतिदा=श्रीकृष्णके प्रेमको प्रदान करनेवाली, ७५४. भीता=श्रीकृष्णके वियोगके भयसे भीत, ७५५. प्रत्यङ्गपुलकाञ्चिता=प्रत्येक अङ्गमें श्रीकृष्ण-प्रेमजनित रोमाञ्चसे युक्त, ७५६. श्रीकृष्णालिङ्गन्रता=श्रीकृष्णका स्पर्श करनेमें तत्पर, ७५७. गोविन्दविरहाक्षमा=श्रीकृष्णका वियोग सहन करनेमें असमर्थ।
७५८. अनन्तगुणसम्पन्ना=अनन्त गुणोंसे युक्त, ७५९. कृष्णकीर्तनलालसा=श्रीकृष्णके नाम और गुणोंके कीर्तन करनेकी रुचिवाली, ७६०. बीजत्रयमयीमूर्तिः=श्रीं, ह्रीं, क्लीं—इन तीन बीजोंसे संयुक्तरूपवाली, ७६१. कृष्णानुग्रहवाञ्छिनी=श्रीकृष्णके अनुग्रहको चाहनेवाली।
७६२. विमलादिनिषेव्या=विमला, उत्कर्षिणी आदि सखियोंद्वारा सेव्य, ७६३. ललिताद्यर्चिता=ललिता आदि सखियोंसे पूजित, ७६४. सती=उत्तम शील और सदाचारसे सम्पन्न, ७६५. पद्मवृन्दस्थिता= कमलवनमें निवास करनेवाली, ७६६. हृष्टा=हर्षसे युक्त, ७६७. त्रिपुरपरिसंवेविता=त्रिपुरसुन्दरीके द्वारा सेवित।
७६८. वृन्दावत्यर्चिता=वृन्दावती देवीके द्वारा पूजित, ७६९. श्रद्धा=श्रद्धास्वरूपा, ७७०. दुर्ज्ञेया=बुद्धिकी पहुँचसे परे, ७७१. भक्तवल्लभा=भक्तप्रिया, ७७२. दुर्लभा=दुष्प्राप्य, ७७३. सान्द्रसौख्यात्मा=घनीभूत सुखस्वरूपा, ७७४. श्रेयोहेतुः=कल्याणकी प्राप्तिमें हेतु, ७७५.सुभोगदा=मुक्तिप्रद भोग देनेवाली।
७७६. सारङ्गा=श्रीकृष्णप्रेमकी प्यासी चातकी, ७७७. शारदा=सरस्वतीस्वरूपा, ७७८. बोधा= ज्ञानमयी, ७७९. सद् वृन्दावनचारिणी=सुन्दर वृन्दावनमें विचरनेवाली, ७८०. ब्रह्मानन्दा=ब्रह्मानन्दस्वरूपा, ७८१. चिदानन्दा=चिदानन्दमयी, ७८२. ध्यानानन्दा= श्रीकृष्ण-ध्यानजनित आनन्दमें मग्न, ७८३. अर्धमात्रिका= अर्धमात्रास्वरूपा।
७८४.गन्धर्वा=गानविद्यामें प्रवीण, ७८५. सुरतज्ञा=सुरतकलाको जाननेवाली, ७८६. गोविन्दप्राणसङ्गमा=गोविन्दके साथ एक प्राण होकर रहनेवाली, ७८७. कृष्णाङ्गभूषणा=श्रीकृष्णके अङ्गोंको विभूषित करनेवाली, ७८८. रत्नभूषणा=रत्नमय आभूषण