संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 633, कुल 770 में से
संदर्भ में पढ़ें- उत्तरभाग * ६३१
दीक्षा ग्रहण करनी चाहिये। जो तीर्थमें कार्तिक-पूर्णिमाका व्रत करता है या कार्तिकके शुक्लपक्षकी एकादशीको व्रत करके मनुष्य यदि सुन्दर कलशोंका दान करता है तो वह भगवान् विष्णुके धाममें जाता है। सालभरतक चलनेवाले व्रतोंकी समाप्ति कार्तिकमें होती है। अतः मोहिनी! मैं कार्तिक मासमें समस्त पापोंके नाश तथा तुम्हारी प्रीतिकी वृद्धिके लिये व्रत-सेवन करूँगा।
मोहिनीने कहा—पृथिवीपते! अब चातुर्मास्यकी विधि और उद्यापनका वर्णन कीजिये, जिससे सब व्रतोंकी पूर्णता होती है। उद्यापनसे व्रतकी न्यूनता दूर होती है और वह पुण्यफलका साधक होता है।
राजा बोले—प्रिये! चातुर्मास्यमें नक्तव्रत करनेवाला पुरुष ब्राह्मणको षड्रस भोजन करावे। अयाचित-व्रतमें सुवर्णसहित वृषभ दान करे। जो प्रतिदिन आँवलेके फलसे स्नान करता है, वह मनुष्य दही और खीर दान करे। सुभ्रु! यदि फल न खानेका नियम ले तो उस अवस्थामें फलदान करे। तेलका त्याग करनेपर घीदान करे और घीका त्याग करनेपर दूधका दान करे। यदि धान्यके त्यागका नियम लिया हो तो उस अवस्थामें अगहनीके चावल या दूसरे किसी धान्यका दान करे। भूमिशयनका नियम लेनेपर गद्दा, रजाई और तकियासहित शय्यादान करे। पत्तेमें भोजनका नियम लेनेवाला मनुष्य घृतसहित पात्रदान करे। मौनव्रती पुरुष घण्टा, तिल और सुवर्णका दान करे। व्रतकी पूर्तिके लिये ब्राह्मण पति-पत्नीको भोजन करावे। दोनोंके लिये उपभोगसामग्री तथा दक्षिणासहित शय्यादान करे। प्रातःस्नानका नियम लेनेपर अश्वदान करे और स्नेहरहित (बिना तेलके) भोजनका नियम लेनेपर घी और सत्तू दान करे। नख और केश न कटाने—धारण करनेका नियम लेनेपर दर्पण दान करे। पादत्राण (जूता, खड़ाऊँ आदि)-के त्यागका नियम लेनेपर जूता दान करे। नमकका त्याग करनेपर गोदान करे। प्रिये! जो इस अभीष्ट व्रतमें प्रतिदिन देवमन्दिरमें दीप-दान करता है, वह सुवर्ण अथवा ताँबेका घृतयुक्त दीपक दान करे तथा व्रतकी पूर्तिके लिये वैष्णवको वस्त्र एवं छत्र दान करे। जो एक दिनका अन्तर देकर उपवास करता है, वह रेशमी वस्त्र दान करे। त्रिरात्र-व्रतमें सुवर्ण तथा वस्त्राभूषणोंसे अलंकृत शय्यादान करे। षड्रात्र आदि उपवासोंमें छत्रसहित शिबिका (पालकी) दान करे। साथ ही हाँकनेवाले पुरुषके साथ मोटा-ताजा गाड़ी खींचनेवाला बैल दान करे। एकभुक्त (आठ पहरमें केवल एक बार भोजन करनेके) व्रतका नियम लेनेपर बकरी और भेड़ दान करे। फलाहारका नियम ग्रहण करनेपर सुवर्णका दान करे। शाकाहारके नियममें फल, घी और सुवर्ण दान करे। सम्पूर्ण रसों तथा अबतक जिनकी चर्चा नहीं की गयी, ऐसी वस्तुओंका त्याग करनेपर अपनी शक्तिके अनुसार सोने-चाँदीका पात्र दान करे। सुभ्रु! जिसके लिये जो दान कर्तव्य बताया गया है, उनका पालन न हो सके तो भगवान् विष्णुके स्मरणपूर्वक ब्राह्मणकी