भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

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श्रीहरिः

विषय-सूची

विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
पूर्वभाग<br>प्रथम पाद<br><br>१- सिद्धाश्रममें शौनकादि महर्षियोंका सूतजीसे प्रश्न तथा सूतजीके द्वारा नारदपुराणकी महिमा और विष्णुभक्तिके माहात्म्यका वर्णन .....................................................१७९- बलिके द्वारा देवताओंकी पराजय तथा अदितिकी तपस्या .....................................५०
२- नारदजीद्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति.......२११०- अदितिको भगवद्दर्शन और वरप्राप्ति, वामनजीका अवतार, बलि-वामन-संवाद, भगवान्‌का तीन पैरसे समस्त ब्रह्माण्डको लेकर बलिको रसातल भेजना ...............५२
३- सृष्टिक्रमका संक्षिप्त वर्णन; द्वीप, समुद्र और भारतवर्षका वर्णन, भारतमें सत्कर्मानुष्ठानकी महत्ता तथा भगवदर्पणपूर्वक कर्म करनेकी आज्ञा......२४११- दानका पात्र, निष्फल दान, उत्तम-मध्यम-अधम दान, धर्मराज-भगीरथ-संवाद, ब्राह्मणको जीविकादानका माहात्म्य तथा तड़ाग-निर्माणजनित पुण्यके विषयमें राजा वीरभद्रकी कथा ...५९
४- श्रद्धा-भक्ति, वर्णाश्रमोचित आचार तथा सत्सङ्गकी महिमा, मृकण्डु मुनिकी तपस्यासे संतुष्ट होकर भगवान्‌का मुनिको दर्शन तथा वरदान देना ..........................२९१२- तड़ाग और तुलसी आदिकी महिमा, भगवान् विष्णु और शिवके ज्ञान-पूजनका महत्त्व एवं विविध दानों तथा देवमन्दिरमें सेवा करनेका माहात्म्य ........६४
५- मार्कण्डेयजीको पिताका उपदेश, समय-निरूपण, मार्कण्डेयद्वारा भगवान्‌की स्तुति और भगवान्‌का मार्कण्डेयजीको भगवद्भक्तोंके लक्षण बताकर वरदान देना .....................................................३४१३- विविध प्रायश्चित्तका वर्णन, इष्टापूर्तका फल और सूतक, श्राद्ध तथा तर्पणका विवेचन .................................................६८
६- गङ्गा-यमुना-संगम, प्रयाग, काशी तथा गङ्गा एवं गायत्रीकी महिमा ...................३८१४- पापियोंको प्राप्त होनेवाली नरकोंकी यातनाओंका वर्णन, भगवद्भक्तिका निरूपण तथा धर्मराजके उपदेशसे भगीरथका गङ्गाजीको लानेके लिये उद्योग ............................................७३
७- असूया-दोषके कारण राजा बाहुकी अवनति और पराजय तथा उनकी मृत्युके बाद रानीका और्व मुनिके आश्रममें रहना ........................................४११५- राजा भगीरथका भृगुजीके आश्रमपर जाकर सत्सङ्ग-लाभ करना तथा हिमालयपर घोर तपस्या करके भगवान् विष्णु और शिवकी कृपासे गङ्गाजीको लाकर पितरोंका उद्धार करना ...............८१
८- सगरका जन्म तथा शत्रुविजय, कपिलके क्रोधसे सगर-पुत्रोंका विनाश तथा भगीरथ-द्वारा लायी हुई गङ्गाजीके स्पर्शसे उन सबका उद्धार..........................................४४१६- मार्गशीर्ष माससे लेकर कार्तिक मासपर्यन्त उद्यापनसहित शुक्लपक्षके द्वादशी-व्रतका
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