भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
वर्णन .....................................................८७वर्णन .....................................................१३४
१७- मार्गशीर्ष-पूर्णिमासे आरम्भ होनेवाले लक्ष्मीनारायण-व्रतकी उद्यापनसहित विधि और महिमा ....................................९३३१- मोक्षप्राप्तिका उपाय, भगवान् विष्णु ही मोक्षदाता हैं—इसका प्रतिपादन, योग तथा उसके अङ्गोंका निरूपण.............१३७
१८- श्रीविष्णुमन्दिरमें ध्वजारोपणकी विधि और महिमा ..............................................९५३२- भवबन्धनसे मुक्तिके लिये भगवान् विष्णुके भजनका उपदेश ..................१४५
१९- हरिपञ्चक-व्रतकी विधि और माहात्म्य ...९७३३- वेदमालिको जानन्ति मुनिका उपदेश तथा वेदमालीकी मुक्ति .......................१४८
२०- मासोपवास-व्रतकी विधि और महिमा ....९९३४- भगवान् विष्णुके भजनकी महिमा—सत्सङ्ग तथा भगवान्‌के चरणोदकसे एक व्याधका उद्धार............................१५१
२१- एकादशी-व्रतकी विधि और महिमा—भद्रशीलकी कथा...............................१००३५- उत्तङ्कके द्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति और भगवान्‌की आज्ञासे उनका नारायणाश्रममें जाकर मुक्त होना .........१५४
२२- चारों वर्णों और द्विजका परिचय तथा विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्मका वर्णन ...........................................१०४३६- भगवान् विष्णुके भजन-पूजनकी महिमा .१५९
२३- संस्कारोंके नियत काल, ब्रह्मचारीके धर्म, अनध्याय तथा वेदाध्ययनकी आवश्यकताका वर्णन ............................१०६३७- इन्द्र और सुधर्मका संवाद, विभिन्न मन्वन्तरोंके इन्द्र और देवताओंका वर्णन तथा भगवद्भजनका माहात्म्य..............१६१
२४- विवाहके योग्य कन्या, विवाहके आठ भेद तथा गृहस्थोचित शिष्टाचारका वर्णन१०९३८- चारों युगोंकी स्थितिका संक्षेपसे तथा कलिधर्मका विस्तारसे वर्णन एवं भगवन्नामकी अद्भुत महिमाका प्रतिपादन१६३
२५- गृहस्थ-सम्बन्धी शौचाचार, स्नान, संध्योपासन आदि तथा वानप्रस्थ और संन्यास-आश्रमके धर्म..........................११०द्वितीय पाद
२६- श्राद्धकी विधि तथा उसके विषयमें अनेक ज्ञातव्य विषयोंका वर्णन ...........११७३९- सृष्टितत्त्वका वर्णन, जीवकी सत्ताका प्रतिपादन और आश्रमोंके आचारका निरूपण..............................................१६९
२७- व्रत, दान और श्राद्ध आदिके लिये तिथियोंका निर्णय.................................१२२४०- उत्तम लोक, अध्यात्मतत्त्व तथा ध्यानयोगका वर्णन...............................१७३
२८- विविध पापोंके प्रायश्चित्तका विधान तथा भगवान् विष्णुके आराधनकी महिमा...............................................१२५४१- पञ्चशिखका राजा जनकको उपदेश......१७७
२९- यमलोकके मार्गमें पापियोंके कष्ट तथा पुण्यात्माओंके सुखका वर्णन एवं कल्पान्तरमें भी कर्मोंके भोगका प्रतिपादन .............................................१३०४२- त्रिविध तापोंसे छूटनेका उपाय, भगवान् तथा वासुदेव आदि शब्दोंकी व्याख्या, परा और अपरा विद्याका निरूपण, खाण्डिक्य और केशिध्वजकी कथा, केशिध्वजद्वारा अविद्याके बीजका प्रतिपादन ...........................................१८२
३०- पापी जीवोंके स्थावर आदि योनियोंमें जन्म लेने और दुःख भोगनेकी अवस्थाका