संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 740, कुल 770 में से
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गणेश, कुमारेश, स्वाककेश, कुलेश्वर, उत्तङ्केश, वह्नीश, गौतम तथा दैत्यसूदनका विधिपूर्वक पूजन करता है, वह कभी दुर्गतिमें नहीं पड़ता। तदनन्तर चक्रतीर्थमें जाकर वहाँ विधिपूर्वक स्नान और गौरीदेवीकी पूजा करके मनुष्य मनोवाञ्छित फल पाता है। वरानने! सन्निहत्यतीर्थमें जाकर वहाँ स्नान तथा देवता आदिका तर्पण करके उसका पूरा फल पाता है। जो भूतेश्वर आदि ग्यारह लिङ्गोंका पूजन करता है, वह इस लोकमें उत्तम भोग प्राप्त करके अन्तमें भगवान् रुद्रके लोकमें जाता है। देवि! जो श्रेष्ठ मानव भगवान् आदिनारायणकी पूजा करता है, वह मोक्षका भागी होता है।
नरेश्वरि! तत्पश्चात् मानव बालब्रह्माके समीप जाकर सब देवताओंसे पूजित हो भोग एवं मोक्षका अधिकारी होता है। तदनन्तर गङ्गा-गणपतिके पास जाकर उनकी विधिपूर्वक पूजा करनेसे श्रद्धालु पुरुष इहलोक और परलोकमें मनोवाञ्छित कामनाएँ प्राप्त कर लेता है। तत्पश्चात् जाम्बवती नदीमें जाकर वहाँ भक्तिभावसे एकाग्रचित्त होकर स्नान और देवता आदिका पूजन करनेसे मनुष्य कृतकृत्य हो जाता है। तदनन्तर पाण्डुकूपमें स्नान करके पाण्डवेश्वरकी पूजा करनी चाहिये। ऐसा करनेवाला मानव स्वर्गलोकमें जाता है। तत्पश्चात् यादवस्थलमें जाकर मानव यदि वर्षेश्वरका पूजन करे तो वह देवराज इन्द्रसे सम्मानित होकर मनोवाञ्छित सिद्धिलाभ करता है। हिरण्यासंगममें स्नान करके जो मानव भक्तिपूर्वक भगवान् शिवकी प्रसन्नताके लिये ब्राह्मणको सुवर्णयुक्त रथ दान करता है, वह अक्षय लोक पाता है। तत्पश्चात् नगरादित्यकी पूजा करके मानव सूर्यलोक प्राप्त कर लेता है। नगरादित्यके समीप बलभद्र, श्रीकृष्ण और सुभद्राका दर्शन एवं विधिपूर्वक पूजन करनेसे मानव भगवान् श्रीकृष्णका सायुज्य-लाभ करता है। तदनन्तर कुमारिकाके समीप जाकर विधिपूर्वक पूजा करके मनुष्य मनोवाञ्छित कामनाओंको प्राप्त कर लेता है और इन्द्रलोकका अधिकारी होता है। जो सरस्वतीके तटपर स्थित ब्रह्मेश्वरका पूजन करता है, वह सब पापोंसे मुक्त हो ब्रह्मलोकमें प्रतिष्ठित होता है। पिङ्गला नदीके समीप जाकर उसमें स्नान करके जो मनुष्य देवता आदिका तर्पण और श्राद्ध करता है, वह फिर इस संसारमें जन्म नहीं लेता। सङ्गमेश्वरका पूजन करनेसे मनुष्य कभी दुर्गतिमें नहीं पड़ता। शङ्करादित्य, घटेश तथा महेश्वरका पूजन करके मनुष्य निश्चय ही अपनी सम्पूर्ण कामनाएँ पा लेता है।
तदनन्तर ऋषितीर्थमें जाय; वहाँ स्नान करके मनको संयममें रखते हुए ऋषियोंका पूजन करे। ऐसा करनेवालेको सम्पूर्ण तीर्थोंका फल प्राप्त होता है। तदनन्तर नन्दादित्यकी पूजा करके मनुष्य सब रोगोंसे मुक्त होता है। तत्पश्चात् त्रित कूपके समीप जाकर वहाँ स्नान करनेसे मनुष्य स्वर्गलोकमें जाता है। तदनन्तर न्यंकुमती नदीके समीप जाकर वहाँ विधिपूर्वक स्नान और सिद्धेश्वरका पूजन करे। ऐसा करनेवाला पुरुष अणिमा आदि सिद्धियोंका भागी होता है। वाराह स्वामीका दर्शन करके मनुष्य भवसागरसे मुक्त हो जाता है। छायालिङ्गका पूजन करके पुरुषको सम्पूर्ण पातकोंसे छुटकारा मिल जाता है। सती मोहिनी! जो मानव कनकनन्दा देवीका भलीभाँति पूजन करता है, वह सम्पूर्ण कामनाओंको पाता और शरीरका अन्त होनेपर स्वर्गलोकमें जाता है। कुन्तीश्वरका पूजन करनेसे मनुष्य सब पातकोंसे छूट जाता है। जो मानव गङ्गाजीमें स्नान करके गङ्गेश्वरका पूजन करता है, वह तीन प्रकारके पापोंसे मुक्त हो जाता है। जो चमसोद्भेदतीर्थमें स्नान करके पिण्डदान करता है, वह गयाकी अपेक्षा कोटिगुने पुण्यका भागी होता है। ब्रह्मकुमारी! तत्पश्चात् उत्तम