नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 117, कुल 304 में से
संदर्भ में पढ़ेंभी अनुशासन बनाये रखने के लिए अत्यन्त कठोर दण्ड देना चाहिए। आहूय साक्षिणः पृच्छेन्नियम्य शपथैर्भृशम्। समस्तान् विदिताचारान् विज्ञातार्थान् पृथक् पृथक् ॥ 198 ॥ साक्षियों के सच्चरित्र तथा उनकी सत्यनिष्ठा से भली प्रकार परिचित होने पर भी न्यायाधिकारी को प्रत्येक साक्षी को अलग अलग बुलाकर और घुमा-फिराकर उनसे प्रश्न पूछने चाहिए। यहां तक कि उन्हें सत्य बोलने की शपथ दिलाकर वास्तविकता को सुनिश्चित करने की अपनी ओर से भरसक चेष्टा करनी चाहिए। कभी कभी सदाचारी व्यक्ति भी किसी विवशता—भय, लोभ, मोह, राग, द्वेष तथा प्रतिशोध की भावना—के कारण असत्य भाषण करने लगता है। अच्छी तरह न टटोले जाने पर उसे अपने उच्च चरित्र का अनुचित लाभ मिल जाता है। अतः किसी व्यक्ति के सच्चरित्र होने के झांसे में आकर उसके वक्तव्य पर सहसा विश्वास नहीं कर लेना चाहिए। सत्येन शापयेद्विप्रं क्षत्रियं वाहनायुधैः। गोबीजकाञ्चनैर्वैश्यं शूद्रं सर्वैस्तु पातकैः ॥ 199 ॥ साक्ष्य के लिए उपस्थित होने वाले ब्राह्मण को सत्य की, क्षत्रिय को अश्व, गज, रथ आदि वाहनों तथा धनुष, खड्ग आदि आयुधों की, वैश्य को गाय आदि पशु, धान्य तथा स्वर्ण आदि की और शूद्र को सभी पापों से आविष्ट होने की शपथ दिलानी चाहिए। उदाहरणार्थ, ब्राह्मण को इस प्रकार शपथ लेनी चाहिए—मैं अपना साक्ष्य सत्यनिष्ठा से प्रस्तुत करूंगा, मेरे मिथ्या भाषण करने पर मैं सत्य से पतित हो जाऊं। इसी प्रकार क्षत्रिय को कहना चाहिए—मैं अपने वाहनों और आयुधों की शपथ लेता हूं कि साक्ष्य में जो कहूंगा, सत्य कहूंगा, सत्य के अतिरिक्त कुछ नहीं कहूंगा। मेरे असत्य-भाषण का अर्थ मेरा वाहनों और आयुधों से वञ्चित होना होगा। इसी प्रकार वैश्य और शूद्र को भी शपथ लेनी चाहिए, अर्थात् सत्य-भाषण के प्रति समर्पित होने का संकल्प प्रकट करना चाहिए। पुराणैर्धर्मवचनैः सत्यमाहात्म्यकीर्तनैः। अनृतस्यापवादैश्च भृशमुत्रासयेदिमान् ॥ 200 ॥ न्यायाधीश द्वारा साक्ष्य के लिए उपस्थित व्यक्तियों को सत्य भाषण से यश, सम्मान और गौरव की वृद्धि सम्बन्धी तथा इसके विपरीत भाषण से अपयश, लोकनिन्दा तथा मानहानि होने सम्बन्धी, कुछ प्राचीन इतिहास, पौराणिक आख्यान तथा अन्यान्य कथापरक उद्धरण एवं उदाहरण आदि सुनाकर उन्हें असत्य भाषण के लिए निरुत्साहित एवं सत्य भाषण के लिए प्रेरित प्रोत्साहित करना चाहिए। नग्नो मुण्डः कपालेन भिक्षार्थी क्षुत्पिपासितः। अन्धः शत्रुगृहं गच्छेद् यः साक्ष्यमनृतं वदेत् ॥ 201 ॥ न्यायाधिकारी को साक्ष्य के लिए उपस्थित व्यक्तियों को चेतावनी के स्वर में नारदस्मृति / 115