भारतकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

पृष्ठ 141, कुल 304 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 141

निरुत्साहान् रुजा क्लिष्यन्तार्ताँश्च न निमज्जयेत्। सद्यो म्रियन्ते मजन्तः स्वल्पप्राणा हि ते स्मृताः ॥ 314 ॥ उत्साहहीन लोगों, रोग-पीड़ितों तथा दुःख-शोक-सन्तप्तों को भी जल दिव्य की अनुमति नहीं देनी चाहिए; क्योंकि ये लोग अपने मनोबल के क्षीण होने के कारण तत्काल घबरा जाते हैं और तनावग्रस्त होकर पानी में स्थिर नहीं रह पाते, अपितु डूबकर शीघ्र ही मर जाते हैं। साहसेनागतानेतानैव तोये निमज्जयेत्। न चापि साधयेदग्निं न विषेण विशोधयेत् ॥ 315 ॥ जल दिव्य के लिए साहस जुटाकर सहमत होने पर भी जल में उतरने से बिदक जाने वालों की निर्दोषिता की सिद्धि के लिए अग्नि दिव्य तथा विष दिव्य आदि साधनों-उपायों को कदापि नहीं अपनाना चाहिए। सत्यानृताविभागस्य तोयाग्नी स्पष्टकृत्तमौ। अद्भ्यश्चाग्निरभूद्यस्मात्तस्मात्तोये विशेषतः ॥ 316 ॥ वस्तुतः किसी भी अभियुक्त के सच्चा-झूठा होने के निर्णय के लिए अग्नि और जल आदि स्पष्ट एवं प्रत्यक्ष प्रमाणों के समान कोई दूसरा साधन नहीं है। अग्नि की उत्पत्ति जल से हुई है, अतः जल की विशिष्टता-महत्ता तो असन्दिग्ध एवं निर्विवाद भी है। क्रियते धर्मतत्त्वज्ञैर्दूषितानां विशोधनम्। तस्मात् सत्येन भगवज्जलेश त्रातुमर्हसि ॥ 317 ॥ अतः धर्म-तत्त्वज्ञ सिद्ध-पुरुष तथाकथित दोषियों को अपनी निर्दोषिता को प्रमाणित करने के लिए जल दिव्य को अपनाने का परामर्श देते हैं। उनके अनुसार अभिशस्त व्यक्ति को जल देवता से प्रार्थना करनी चाहिए कि हे वरुणदेव! मैं आपकी शरण में आया हूं, आप तो सर्वज्ञ हैं, आप मेरी वास्तविकता से भी परिचित हैं। अतः आप ही मुझ पर लगे मिथ्या आरोप के कलंक से मुझे मुक्त एवं शुद्ध कर सकते हैं। आप मुझे अपनी कृपा से वञ्चित न करें। अतः परं प्रवक्ष्यामि विषस्य विधिमुत्तमम्। यस्मिन् काले यथा प्रोक्तं यादृशं परिकीर्तितम् ॥ 318 ॥ अब हम सही ढंग से विष विधि का परिचय देंगे और यह बतायेंगे कि कब, कैसे और किस रूप में इसका प्रयोग किया जाता है। यावन्मात्रं समुद्दिष्टं धर्मतत्त्वार्थदर्शिभिः। तुलयित्वा शरत्काले देयमेतद्धिमागमे ॥ 319 ॥ नारदस्मृति / 139

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित) · पृष्ठ 141, कुल 304 में से · BharatKosha