भारतकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

पृष्ठ 152, कुल 304 में से

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याचित — काम चलाने के लिए आभूषण, वस्त्र, शस्त्र आदि मांगकर ले जाना और फिर लौटाने का नाम न लेना। अन्वाहित — किसी को देने के लिए लिया गया सामान, सम्बद्ध स्थान पर सम्बद्ध व्यक्ति को न पहुंचाकर, अपने पास रख लेना। शिल्प — कारीगर, लोहार, सोनार आदि द्वारा धन अथवा स्वर्ण आदि लेकर मूर्ति, चित्र, आभूषण आदि बनाकर न देना। उपनिधि — स्वर्णकार आदि शिल्पियों को नमूने की नक़ल के लिए दिये गये सामान को उनके द्वारा हड़प लेना। न्यास — किसी को थोड़े समय के लिए सामान की सुरक्षा का दायित्व सौंपना और उस व्यक्ति का सामान को लेकर चलते बनना तथा प्रतिन्यास — आदान-प्रदान के आधार पर किसी की वस्तु की रक्षा के बदले अपनी वस्तु की रक्षा का दायित्व सौंपना और उस व्यक्ति द्वारा अपनी वस्तु को सुरक्षित पाकर दूसरे की वस्तु के प्रति उपेक्षा दिखाना। प्रतिगृह्णाति पोगण्डं यश्च सप्रधनं नरः। तस्याप्येष भवेद्धर्मः षडेते विधयः समा॥ 15 ॥ इसी प्रकार जब किसी अनाथ बालक को फुसलाकर ग्रहीता उसका सामान अपने पास रखवा तो लेता है, परन्तु उसके द्वारा मांग करने पर लौटाने से इनकार करता है, तो ऐसे व्यक्ति को भी निक्षेप हड़पने के लिए निर्दिष्ट दण्ड देना चाहिए। ॥ चतुर्थ अध्याय का द्वितीय प्रकरण समाप्त ॥ 150 / नारदस्मृति