नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंनिर्धारित करके उसे कोई काम सौंपता है, तो शिष्य को अनुकूल प्रतीत होने पर अपनी स्वीकृति देनी चाहिए और वेतन लेने में भी आनाकानी नहीं करनी चाहिए। हां, उस अवधि में उसे किसी के घर में न रहकर अपने आवास की व्यवस्था स्वयं करनी चाहिए। अभिप्राय यह है कि जब शिष्य वेतनभोगी है, तो उसे गुरुकुल में मुफ़्त आवास और भोजन पाने का कोई अधिकार नहीं रह जाता। यदि वह सुविधाओं का उपभोग करता है, तो फिर वेतन पाने के उसके अधिकार के आगे प्रश्नचिह्न लग जाता है। भृतकस्त्रिविधो ज्ञेय उत्तमो मध्यमोऽधमः । शक्तिभक्त्यनुरूपा स्यादेषां कर्माश्रया भृतिः ॥ २२ ॥ भृतक—वेतनभोगी—के तीन स्तर अथवा भेद हैं—उत्तम, मध्यम और अधम। आज की भाषा में प्रथम श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी, द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी तथा तृतीय श्रेणी के अराजपत्रित कर्मचारी। इनके वेतन निर्धारण के तीन आधार अथवा मापदण्ड हैं—1. शक्ति, अर्थात् कार्य करने की क्षमता, 2. भक्ति, अर्थात् कार्य के प्रति निष्ठा एवं समर्पण का भाव तथा 3. कर्म, अर्थात् कार्य का स्वरूप एवं महत्त्व। उत्तमस्त्वायुधीयोऽत्र मध्यमस्तु कृषीवलः। अधमो भारवाहः स्यादित्येष त्रिविधो स्मृतः ॥ २३ ॥ आयुधधारी, अर्थात् देश की रक्षा, शान्ति और व्यवस्था को बनाये रखने आदि कठोर दायित्व के निर्वहण के प्रति समर्पित तथा प्राणों का संकट झेलने को सदैव उत्तम श्रेणी का कर्म समझना चाहिए। कृषि, वाणिज्य और पशुपालन से देश की समृद्धि में योगदान, देशवासियों के भरण-पोषण का दायित्व निभाना मध्यम कर्म है। भार ढोना, लकड़ियां काटना, पानी भरना, धान्य साफ़ करना तथा वस्त्र- प्रक्षालन आदि सेवाकार्य अधम कर्म हैं। अर्थेष्वधिकृतो यः स्यात् कुटुम्बस्य तथोपरि। सोऽपि कर्मकरो ज्ञेयः स च कौटुम्बिकः स्मृतः ॥ २४ ॥ कुटुम्ब के सभी सदस्यों के भरण-पोषण का दायित्व निभाने वाला, कुटुम्ब की चल-अचल सम्पत्ति की देखभाल करने वाला तथा परिवार के लिए आय की व्यवस्था करने के लिए अधिकृत व्यक्ति भी कर्मकर माना जाता है। शुभकर्मकरास्त्वेते चत्वारः समुदाहृताः। जघन्यकर्मभाजस्तु शेषा दासास्त्रिपञ्चकाः ॥ २५ ॥ शुभ कर्मकरों के चार रूप-भेद हैं, शेष सारे भेद अशुभ कर्मकरों के हैं। दासों के पन्द्रह प्रकार-भेद हैं। नारदस्मृति / 165