भारतकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

पृष्ठ 175, कुल 304 में से

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किराये के मकान में मकान-मालिक की अनुमति से अपने ख़र्च पर अस्थायी निर्माण करने वाले व्यक्ति को मकान छोड़ते समय निर्माण से सम्बन्धित सामान- लकड़ी, ईंटें, दरवाज़ा आदि-ले जाने का पूरा अधिकार है। स्तोमं विना वसित्वा तु परभूमावनिच्छतः। निर्गच्छंस्तृणकाष्ठानि न गृह्णीयात् कदाचन ॥ २१ ॥ मकान-मालिक की अनुमति तथा जानकारी के बिना किराये के मकान में किसी प्रकार का निर्माण करने वाले व्यक्ति को मकान छोड़ने पर कोई भी सामान ले जाने का अधिकार नहीं होता। अस्थायी निर्माण मकान-मालिक की सम्पत्ति माना जाता है। स्तोमवाहीनि भाण्डानि पूर्णकालान्युपानयेत्। गृहीतुराभवेद्भग्नं नष्टं चान्यत्र सम्प्लवात् ॥ २२ ॥ सामान पहुंचाने का किराया लेकर निश्चित समय में सामान न पहुंचाने वाले को, किसी वस्तु के नष्ट-भ्रष्ट हो जाने की भरपाई करनी होती है। उदाहरणार्थ, फल-सब्जी का सड़-गल जाना, दूध-दही का फट जाना, खट्टा हो जाना, फ्रिज में ख़राबी आ जाना आदि। हां, दैवी आपत्ति-बिजली चले जाना, टायर फट जाना अथवा दुर्घटना हो जाना अथवा घोड़े या बैल आदि का गिर पड़ना आदि तथा राजकीय संकट-पुलिस द्वारा रोकना, रास्ता बन्द होना, चक्कर काटकर जाने को विवश होना आदि-में सञ्चालक का दोष न होने के कारण उसे हानि के लिए उत्तरदायी नहीं माना जा सकता। ॥ चतुर्थ अध्याय का षष्ठ प्रकरण समाप्त ॥

नारदस्मृति / 173