भारतकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

पृष्ठ 182, कुल 304 में से

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पृष्ठ 182
  1. क्रीतानुशय क्रीत्वा मूल्येन यः पण्यं क्रेता न बहु मन्यते। क्रीतानुशय इत्येतद्विवादपदमुच्यते ॥ 1 ॥ जहां क्रेता सामान ख़रीदकर और दाम चुकाकर अपने को ठगा गया, अर्थात् सौदे में गड़बड़ी अनुभव करता है, वहां क्रेता-विक्रेता में उत्पन्न विवाद 'क्रीतानुशय विवाद' कहलाता है। क्रीत्वा मूल्येन यः पण्यं दुष्क्रीतं मन्यते क्रयी। विक्रेतुः प्रतिदेयं तत्तस्मिन्नेवाह्न्यविक्षतम् ॥ 2 ॥ मूल्य देकर ख़रीदे गये सामान में धोखा पाने पर क्रेता को उसी दिन, सारा सामान उसी स्थिति में विक्रेता को लौटा देना चाहिए। क्रेता को सामान को खोलना, उलटना-पुलटना, सील तोड़ना, पैकिंग को बिगाड़ना तथा अन्य कोई चिह्न बनाना आदि कोई कार्य कदापि नहीं करना चाहिए। द्वितीयेऽह्नि ददत् क्रेता मूल्यात्त्रिंशांशमाहरेत्। द्विगुणं तु तृतीयेऽह्नि परतः क्रेतुरेव तत्॥ 3 ॥ यदि ख़रीदे गये माल को पसन्द न करने वाला क्रेता उसी दिन सही हालत में सामान न लौटा कर दूसरे दिन लौटाता है, तो विक्रेता को मूल्य के रूप में प्राप्त धन से तीस प्रतिशत की कटौती करके शेष धन लौटा देना चाहिए। तीसरे दिन पण्य लौटाने वाला क्रेता चुकाये गये मूल्य का आधा लेने का अधिकारी होता है। तीन दिनों के पश्चात् ख़रीदे गये सामान को लौटाने वाले क्रेता के अनुरोध को मानने अथवा न मानने को विक्रेता स्वतन्त्र है। विक्रेता अपनी शर्तों पर सामान वापस भी ले सकता है और वापस लेने से इनकार भी कर सकता है। क्रेता पण्यं परीक्षेत प्राक् स्वयं गुणदोषतः। परीक्ष्याभिमतं क्रीतं विक्रेतुर्न भवेत् पुनः॥ 4 ॥ क्रेता को सामान ख़रीदने से पहले सामान की स्थिति, उसके गुण-दोष और उसकी उपयोगिता आदि की भली प्रकार से जांच परख कर लेनी चाहिए। इस जांच-परख और निजी पसन्द के पश्चात् खरीदा गया सामान विक्रेता को लौटाया नहीं जा सकता। 180 / नारदस्मृति