नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 239, कुल 304 में से
संदर्भ में पढ़ेंवासःपश्वन्नपानानां गृहोपकरणस्य च। एतेनैव प्रकारेण मध्यमं साहसं स्मृतम्॥ 5 ॥ वस्त्रों, गाय--भैंस आदि पशुओं, पक्व धान्य तथा दुग्धादि पेयपदार्थों, आवास- भवनों तथा आजीविका के साधन- भूत उपकरणों को हानि पहुंचाना, उन्हें नष्ट-भ्रष्ट करना मध्यम स्तर का साहस है। व्यापादो विषशस्त्राद्यैः परदाराभिमर्शनम्। प्राणोपरोधि यच्चान्यदुक्तमुत्तमसाहसम् ॥ 6 ॥ विष देकर अथवा शस्त्र प्रहार द्वारा मनुष्यों का वध करना, परस्त्रियों से बलात्कार तथा इस प्रकार के उग्र कर्म उत्तम साहस के अन्तर्गत परिगणित हैं। तस्य दण्डः क्रियापेक्षः प्रथमस्य शतावरः। मध्यमस्य तु शास्त्रज्ञैर्दृष्टैः पञ्चशतावरः॥ 7 ॥ यूं तो साहसिक कार्यों का दण्ड कार्य के परिमाण के आधार पर निश्चित किया जाना चाहिए, पुनरपि प्रथम साहस का दण्ड कम-से-कम सौ पण और मध्यम साहस का दण्ड पांच सौ पण वसूल करना चाहिए। उत्तमे साहसे दण्डः सहस्त्रावर इष्यते। वधः सर्वस्वहरणं पुरान्निर्वासनाङ्कने। तदङ्गच्छेद इत्युक्तो दण्ड उत्तमसाहसे॥ 8 ॥ उत्तम साहस का दण्ड कम-से-कम हज़ार पण है। इसके अतिरिक्त दुष्टता की गम्भीरता को देखते हुए साहसिक को मृत्यु-दण्ड, देश-निकाला, उसकी सारी सम्पत्ति छीन लेना, उसे कोड़े लगवाना, उसका अंग-भंग करना तथा उसके शरीर को गोदवाना व पापी को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना आदि दण्ड भी दिये जाने चाहिए। अविशेषेण सर्वेषामेष दण्डविधिः स्मृतः। वधादृते ब्राह्मणस्य न वधं ब्राह्मणोऽर्हति॥ 9 ॥ ब्राह्मण द्वारा भी इस प्रकार के निकृष्ट साहसिक कार्य किये जाने पर उसे मृत्यु-दण्ड के अतिरिक्त उसके कार्य के परिणाम के अनुरूप अन्य सभी प्रकार के दण्ड दिये जा सकते हैं। यह सही है कि ब्राह्मण अवध्य है, परन्तु इससे उसे जघन्य कार्यों के करने की छूट नहीं मिल जाती। शिरसौ मुण्डनं दण्डस्तस्य निर्वासनं पुरात्। ललाटे चाभिशस्ताङ्कः प्रयाणं गर्दभेन च॥ 10 ॥ ब्राह्मण द्वारा निन्दनीय साहसिक कार्य किये जाने पर उसे निम्नोक्त प्रकार से दण्डित किया जाना चाहिए—
- उसका सिर मुंडवा देना चाहिए। (प्राचीनकाल में किसी प्रियजन की नारदस्मृति / 237