नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ
पृष्ठ 242, कुल 304 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 242
उपायैर्विविधैः सर्वैः कल्पयित्वापकर्षणम्। सुप्तप्रमत्तमत्तेभ्यः स्तेयमाहुर्मनीषिणः॥ 17 ॥ मनीषियों के निश्चिन्त होकर सोये हुए व्यक्ति के, अपने सामान की देखभाल न करने वाले व्यक्ति के तथा नशे में डूबे व्यक्ति के सामान के अपहरण को ही 'स्तेय' नाम दिया है। अपहरण में प्रयुक्त होने वाले कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं—
- सन्देश—सामान के स्वामी को किसी के नाम से बुलाने का झूठा सन्देश देना तथा स्वामी द्वारा सामान को छोड़कर जाते ही सामान को उठाकर चलते बनना।
- कूटलेख्य—पढ़ने की प्रार्थना के बहाने सामान के स्वामी का ध्यान दूसरी ओर बंटाकर अवसर पाते ही सामान को उड़ा लेना।
- सन्धिच्छेद—अपनी धूर्तता से साथियों को भिड़ाकर उनका ध्यान सामान से हटाकर सामान को उड़ा लेना तथा
- ग्रन्थिभेद—प्रार्थना से सामान के स्वामी को उलझाना और उसका सामान उड़ा लेना। सहोढग्रहणात् स्तेयं होढमत्युपभोगतः। शङ्का ऽत्वसज्जनैकत्वाद न्यायव्ययतस्तथा ॥ 18 ॥ निम्नोक्त तथ्यों से 'स्तेय' का अनुमान करना चाहिए—
- चोरी हुए सामान में से किसी वस्तु का मिलना।
- व्यक्ति द्वारा विलासिता की वस्तुओं पर अन्धाधुन्ध ख़र्च करना।
- व्यक्ति का निन्दित व्यक्तियों से मैत्री-सम्बन्ध रखना।
- व्यक्ति की आय के किसी साधन के न होने पर भी उसका हाथ खुला होना तथा
- व्यक्ति का दुर्व्यसनों—द्यूत, मदिरा-सेवन, वेश्यागमन आदि में लिप्त होना। भक्तावकाशदातारः स्तेनानां ये प्रसर्पताम्। शक्ताश्च य उपेक्षन्ते तेऽपि तद्दोषभागिनः ॥ 19 ॥ निम्नोक्त चारों को भी चोर समझना चाहिए और उन्हें चोरों के लिए निर्धारित दण्ड देना चाहिए—
- चोरों की जानकारी होने पर भी उनकी उपेक्षा करने वाले, अर्थात् प्रशासन अथवा पड़ोसियों को सूचना न देने वाले।
- किसी के घर में घुसते अथवा किसी का सामान चुराते चोरों को देखकर भी उनकी रोक-टोक न करने वाले तथा उनके भय से गृह-स्वामियों को सूचित न करने वाले। 3 समर्थ होने पर भी चोरों का सामना न करने वाले तथा 240 / नारदस्मृति