भारतकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

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मनीषियों ने द्रव्य के महत्त्व एवं परिमाण तथा मूल्य के परिप्रेक्ष्य में इस आधि के भी तीन-क्षुद्र, मध्यम और उत्तम-भेद बताये हैं। साधारण वस्तु का बलात् ग्रहण क्षुद्र, मध्यम स्तर के पदार्थ का अपहरण मध्यम तथा अत्यधिक मूल्यवान् सम्पत्ति पर बलपूर्वक क़ब्ज़ा उत्तम साहस कहलाता है। मृद्भाण्डासनखट्वास्थिदारुचर्मतृणादि यत्। शमीधान्यं कृतान्नं च क्षुद्रद्रव्यमुदाहृतम् ॥ 14 ॥ क्षुद्र पदार्थों के रूप में परिगणित पदार्थ हैं-1. मिट्टी से बने पात्र, 2. आसन कुर्सी, चौकी आदि, 3. खाट-पलंग, शैया आदि, 4. अस्थि-गज की अस्थि अथवा अस्थि से निर्मित माला आदि, 5. काष्ठ-चन्दन, देवदारु आदि बहुमूल्य वृक्षों की लकड़ी, 6. चर्म-सिंह, व्याघ्र, मृग तथा सर्प आदि की खाल, 7. तृण-बहुमूल्य प्रकार की घास फूस, 8. शमी वृक्ष की लकड़ी, 9. धान्य- चावल, गेहूं आदि तथा 10. पका भोजन। टिप्पणी- भारत में शमी वृक्ष की पूजा होती है। विवाह के लिए वधू के घर जाने से पूर्व वर को अपने शस्त्रों के तीखेपन की परख के लिए शमी वृक्ष की लकड़ी को काटना होता था। पाणिनि के साक्ष्य के अनुसार- लड़की को पाने के लिए विभिन्न गुटों में युद्ध-संघर्ष होते रहते थे। अतः वर को अश्वारूढ़ होकर शस्त्र सञ्चालन करना होता था। अतः शस्त्रों-उस युग में द्वन्द्व युद्ध में प्रयुक्त होने वाले खड्ग आदि-की तीव्रता को जांच-परख करना आवश्यक था और इसके लिए शमी वृक्ष की लकड़ी को काटना सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता था। यह प्रथा नाममात्र के लिए ही सही, आज भी प्रचलित है। इसका अर्थ है कि शमी वृक्ष की लकड़ी अन्य लकड़ी से अधिक कठोर होती थी। वासः कौशेयवर्जं च गोवर्जं पशुवस्तथा। हिरण्यवर्जं लोहं च मध्यं व्रीहिजवा अपि ॥ 15 ॥ मध्यम साहस के अन्तर्गत निम्नोक्त पदार्थ परिगणित हैं-1. मूल्यवान् सूती और ऊनी वस्त्र, 2. गाय को छोड़कर अन्य पशु-ऊंट, गर्दभ और भैंसा आदि 3. स्वर्ण को छोड़कर अन्य धातुएं-चांदी, तांबा, कांसा तथा लौह आदि तथा 4. धान, जौ आदि। हिरण्यरत्नकौशेयस्त्रीपुंगोगजवाजिनः । देवब्राह्मणराज्ञां च विज्ञेयं द्रव्यमुत्तमम् ॥ 16 ॥ उत्तम साहस के अन्तर्गत परिगणित पदार्थ हैं-1. हिरण्य (स्वर्ण), 2. रत्न, 3. कौशेय (रेशमी) वस्त्र, 4. स्त्री, 5. पुरुष (दास), 6. गाय, गज, अश्व आदि पशु तथा 7. देवता, ब्राह्मण अथवा राजा को देय द्रव्य (धन) अथवा पदार्थ-सामग्री आदि। नारदस्मृति / 239