भारतकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

पृष्ठ 245, कुल 304 में से

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  1. वाक्पारुष्य एवं दण्डपारुष्य देशजातिकुलादीनामाक्रोशन्त्यङ्गसंयुतम् । यद्वचः प्रतिकूलार्थं वाक्पारुष्यं तदुच्यते ॥ 1 ॥ व्यक्ति के देश की, उसकी जाति की तथा उसके वंश की निन्दा करना, उसे हीन बताना, उस पर आक्षेप करना, उस पर सच्चे-झूठे आरोप लगाना, उसका अपमान करना तथा उसके प्रति अपशब्दों, दुष्टवाक्यों और निकृष्ट भाषा का प्रयोग करना अथवा उसकी कलंकित एवं क्षुद्र व्यक्तियों से तुलना करना आदि 'वाक्- पारुष्य' कहलाता है। निष्ठुराश्लीलतीव्रत्वात्तदपि त्रिविधं स्मृतम् । गौरैवानुक्रमात्तस्य दण्डोऽप्यत्र क्रमाद् गुरुः ॥ 2 ॥ साहस के समान वाक्-पारुष्य के भी तीन भेद हैं-निष्ठुर, अश्लील और तीव्र। इन्हें ही क्रमशः क्षुद्र, मध्यम और उत्तम समझना चाहिए तथा निष्ठुर से अश्लील को गुरु से गुरुतर और अश्लील से तीव्र को गुरुतर से गुरुतम समझना और तदनुरूप दण्ड-विधान समझना चाहिए। साक्षेपं निष्ठुरं ज्ञेयमश्लीलन्त्यङ्गसंयुतम् । पातनीयैरुपक्रोशैस्तीव्रमाहुर्मनीषिणः ॥ 3 ॥ मनीषियों के अनुसार आक्षेप करना वाक्-पारुष्य है, अपशब्दों-सार्वजनिक रूप से बोलने-सुनने में लज्जा-संकोच उत्पन्न करने वाले-का प्रयोग अश्लील वाक्-पारुष्य है तथा किसी पतन-जैसे अत्यन्त निन्दनीय कर्म से जोड़कर व घोर अपमान कर आक्रोशपूर्वक बोलना तीव्र वाक्-पारुष्य है। परगात्रेष्वभिद्रोहो हस्तपादायुधादिभिः । भस्मादीनामुपक्षेपैर्दण्डपारुष्यमुच्यते ॥ 4 ॥ क्रोध के आवेश में अपने हाथों, पैरों तथा शस्त्रों-दण्डा, लाठी, चाकू, छुरी तथा तलवार आदि के अतिरिक्त रस्सी, पत्थर और लौह-छड़ी-से किसी दूसरे पर प्रहार करना, उसे बुरी तरह घायल करना, उसका अंग-भंग करना, उसकी हड्डी- पसली तोड़ना अथवा उस पर गरम राख फेंकना 'दण्ड-पारुष्य' कहलाता है। तस्यापि दृष्टं त्रैविध्यं मृदुमध्योत्तमं क्रमात् । अवगोरण निःशङ्कपातनक्षतदर्शनैः ॥ 5 ॥ नारदस्मृति / 243