नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 266, कुल 304 में से
संदर्भ में पढ़ेंदृष्टि बचाकर दूसरे के सामान को उड़ा लेना। ३. देश, ग्राम अथवा भवन में गुप्त रूप से तोड़-फोड़ करना, आग लगाना तथा सेंध मारना आदि। ४. यज्ञ-विध्वंस करना। ५. तारों, रज्जुओ आदि के जोड़ों (गांठों) को क्षति पहुंचाना तथा ६. असावधान अथवा सोये हुए लोगों पर आक्रमण करना, उन्हें धर-दबोचना अथवा गुप्त रूप से हत्याएं करना आदि। अप्रकाशाश्च विज्ञेया बहिरभ्यन्तराश्रिताः। मुष्यां प्रसस्तांश्च नरा मुष्णन्त्याक्रम्य चैव ते ॥ ४॥ देशग्रामगृहघ्नाश्च यज्ञघ्ना ग्रन्थिमोचकाः। इत्येवमादयो ज्ञेयाः अप्रकाशाश्च तस्कराः॥ ५॥ न त्वहोढान्विताश्चौरा वध्या राज्ञा ह्यनागसः। सहोढान् स्तेयकरणात् क्षिप्रं चौरान् प्रशासयेत् ॥ ६॥ चोरी हुए सामान के न मिलने पर सन्देह में पकड़े गये चोर को दण्डित नहीं करना चाहिए तथा चोरी के सामान के साथ पकड़े गये चोर को दण्डित करने में किसी प्रकार की ढील नहीं करनी चाहिए। स्वदेशघातिनो ये स्युस्तथा यज्ञावरोधिनः। तेषां सर्वस्वमादाय भूयो निन्दां प्रकल्पयेत्॥ ७॥ अपने देश में तोड़-फोड़ करने वालों, अराजकता फैलाने वालों तथा यज्ञ- यागादि में विघ्न-बाधा डालने वालों का सर्वस्व (सारी सम्पत्ति) छीनकर उन्हें सार्वजनिक रूप से निन्दित-अपमानित करना चाहिए। आज की भाषा में सार्वजनिक स्थान पर उनके फ़ोटो सहित इश्तहार लगवाने चाहिए, जिसमें उनके कारनामों का वर्णन रहना चाहिए। समाचार-पत्रों में उनकी निन्दा प्रकाशित करवानी चाहिए। इस प्रकार उन्हें समाज में मुंह दिखाने योग्य नहीं रहने देना चाहिए। अहोढान्विमृशेच्चौरान् गृहीतान् यदि शङ्कया। भयोपधाभिश्चिन्ताभिर्ब्रूयुस्तथा यथा कृतम्॥ ८॥ चोरी के सामान को अपने पास न रखने वाले धूर्त एवं चतुर व्यक्ति को डरा धमकाकर तथा पिटाई करके उससे सत्य उगलवाना चाहिए। देशं कालं दिशं जातिं नामं वा सम्प्रतिश्रयम्। कृतं कर्मकरा वा स्युः प्रष्टव्यास्ते विनिग्रहे ॥ ९॥ 264 / नारदस्मृति