भारतकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

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पृष्ठ 265
  1. परिशिष्ट भांति-भांति के तस्करों के प्रकार द्विविधास्तस्करा ज्ञेयाः परद्रव्यापहारिणः । प्रकाशाश्चाप्रकाशाश्च तान् विद्यादात्मवान्नृपः ॥ 1 ॥ दूसरे के द्रव्य का अपहरण करने वाले तस्कर—चोर, डाकू—कहलाते हैं। विवेकशील राजा को जान लेना चाहिए कि ये तस्कर दो प्रकार के होते हैं—1. गुप्त अथवा प्रच्छन्न तस्कर तथा 2. प्रकाश-तस्कर, अर्थात् सर्वजनविदित। प्रकाशवञ्चकास्ते तु कूटमानतुलाश्रिताः। उत्कोचकाः साहिसकाः कितवाः पण्ययोषितः ॥ 2 ॥ प्रकाश-तस्करों के कुछ रूप-भेद इस प्रकार हैं—
  2. माप-तौल में छल-कपट द्वारा न्यूनाधिक करना।
  3. किसी कार्य को पूरा करने-कराने के लिए घूस लेना।
  4. किसी उचित-अनुचित कार्य को करने के लिए दूसरे को विवश करना, अपनी शक्ति का दुरुपयोग करना, साहसिक पग उठाना, अर्थात् वध करने व अंग भंग करने-जैसी धमकी देकर काम निकालना।
  5. द्यूत-क्रीड़ा में लिप्त होना तथा हेरा-फेरी करना।
  6. वेश्या—सम्पन्न युवकों को चरित्रभ्रष्ट करने वाली—नगरवधू।
  7. अपनी बौद्धिक चातुरी से नकली वस्तु को असली बताकर बेचना तथा
  8. भोले-भाले लोगों के हितचिन्तक बनकर उन्हें ठगना, मूर्ख बनाना और इस प्रकार अपनी आजीविका चलाना। प्रतिरूपकराश्चैव मङ्गलादेशवृत्तयः। इत्येवमादयो ज्ञेयाः प्रकाशलोकतस्कराः ॥ 3 ॥ निम्नोक्त ढंग से चोरी-हेराफेरी करने वाले धूर्त व्यक्ति प्रच्छन्न-तस्कर (छिपे चोर-डाकू—गुप्त रूप से काम-धन्धा करने वाले) कहलाते हैं।
  9. स्वयं घर, दुकान आदि के बाहर रहकर, दूसरों को भीतर घुसाकर अथवा दूसरों को बाहर रखवाली के लिए खड़ा कर स्वयं भीतर प्रविष्ट होकर चोरी करना।
  10. स्वामी की अनुपस्थिति में अथवा उसका ध्यान बंटाकर अथवा उसकी नारदस्मृति / 263