नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपाती। इस प्रकार सुरक्षा की आवश्यकता की पूर्ति के लिए ही शासन-प्रणाली का जन्म तथा दण्ड-संहिता का प्रवर्तन हुआ होगा, जिसका लेखा-जोखा स्मृति ग्रन्थ हैं। स्मृति ग्रन्थों में कतिपय उल्लेखनीय ग्रन्थ हैं— भगवान् शंकरकृत-वैशालाक्ष, देवराज इन्द्रककृत-बाहुदन्तक, देवगुरु बृहस्पतिकृत नीतिशास्त्र, दैत्यगुरु शुक्राचार्य द्वारा रचित नीतिशास्त्र, महर्षि वैशम्पायन कृत नीतिशास्त्र आदि। आज उपलब्ध स्मृतियों में प्रमुख हैं—मनुस्मृति, याज्ञवल्कवय- स्मृति, विष्णुस्मृति, नारदस्मृति आदि। स्वयं देवर्षि नारद ने निम्नोक्त पूर्ववती स्मृतिकारों का उल्लेख इस प्रकार से किया है— उपलब्ध स्मृतियों के सभी स्मृतिकारों ने समान रूप से मनु महाराज को अत्यन्त महत्त्व और गौरव दिया है। मनुस्मृति की सर्वाधिक प्रसिद्धि तथा प्रचलन भी इसकी सर्वाधिक लोकप्रियता का प्रमाण है, परन्तु 'नारदस्मृति' को देखने पर हमें अपनी धारणा को बदलना पड़ा है। इसमें जैसा संक्षिप्त, तर्कसंगत, उपयोगी, व्यावहारिक एवं आवश्यक विवेचन हुआ है, वैसा अन्यत्र दुर्लभ है। इसमें आचार- संहिता, व्यवहार-पद, दण्ड-प्रणाली तथा राज-धर्म का जैसा उत्कृष्ट, वैज्ञानिक, तर्कपरक, युक्तियुक्त, सरल एवं संक्षिप्त परिचय दिया गया है, वह अपने आप में अनुपम एवं अद्वितीय है। स्मृतियों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर पाठकों को हमारे कथन की सत्यता का ज्ञान स्वतः हो जायेगा। इस ग्रन्थ के प्रकाशक महोदय ने इस बहुमूल्य (दुर्लभ) ग्रन्थ का अनुवाद प्रकाशित करके न केवल हिन्दी जानने वालों का, अपितु इस ग्रन्थ से अपरिचित संस्कृत के ज्ञाताओं का भी महान् उपकार किया है। आशा है कि प्राचीन साहित्य के अनुरागी प्रकाशक महोदय के इस प्रयास का अभिनन्दन करेंगे और उन्हें दुर्लभ ग्रन्थों के प्रकाशन की योजना में संलग्न रहने के लिए उत्साहित करेंगे। —रामचन्द्र वर्मा