भारतकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

पृष्ठ 94, कुल 304 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 94

द्विगुणं त्रिगुणं वापि तथान्यत्र चतुर्गुणम्। तथाष्टगुणमन्यस्मिन् देयं देशेऽवतिष्ठते॥ 106 ॥ किसी प्रदेश अथवा क्षेत्र में ऋण-राशि में दो प्रतिशत, कहीं तीन प्रतिशत, कहीं चार प्रतिशत, तो कहीं किसी अन्य क्षेत्र में आठ प्रतिशत ब्याज के लेन देन का प्रचलन है। जहां जैसी व्यवस्था हो तथा जहां जैसा लेन देन करने वालों को मान्य हो, वहां वैसा व्यवहार करना उचित है। हिरण्यधान्यवस्त्राणां वृद्धिर्द्विस्त्रिश्चतुर्गुणा। रसस्याष्टगुणा वृद्धिः स्त्रीपशूनां च सन्ततिः॥ 107 ॥ स्वर्ण, धान्य और वस्त्रों को गिरवी रखकर दिये जाने वाली ऋण राशि पर क्रमशः दो, तीन और चार प्रतिशत ब्याज वसूल करना चाहिए। इसी प्रकार दूध, दही आदि को गिरवी रखने पर आठ प्रतिशत ब्याज लेना उचित है। स्त्रियों और पशुओं को गिरवी रखकर लिये ऋण पर कोई ब्याज नहीं वसूल किया जाता। उनकी सन्तति पर ऋणदाता का अधिकार होता है। इसका अर्थ यह है कि ऋणदाता बन्धक रूप में रखी स्त्री को भोगने और पशु से काम लेने को स्वतन्त्र है। न वृद्धिः प्रीतिदत्तानां स्यादनाकारिता क्वचित्। अनाकारितमप्यूर्ध्वं वत्सराधार्द्धात्प्रवर्धते॥ 108 ॥ प्रेम-वश उपहार अथवा दान-रूप में दिये गये धन—नक़द रुपया, स्वर्ण- रजत, स्त्री, पशु आदि—पर किसी प्रकार का न तो कोई ब्याज वसूल किया जाता है और न ही दिया धन लौटाया जाता है। हां, यदि किसी निश्चित अवधि के लिए बिना ब्याज के लिया धन उस अवधि के बीतने पर नहीं लौटाया जाता, तो ऋणकर्ता को अवधि के बाद के समय पर अपने ऋण पर ब्याज लेने का पूरा अधिकार होता है। भले ही ऐसा लिखित अनुबन्ध किया गया हो अथवा न किया गया हो, निर्धारित अवधि के उपरान्त ब्याज देय होता है। प्रीतिदत्तं तु यत् किञ्चिन्न तद्वर्धेतयाचितम्। याच्यमानमदत्तं चेद् वर्धते पञ्चकं शतम्॥ 109 ॥ किसी आत्मीय बन्धु को प्रेम-सम्बन्ध से, बिना अवधि निर्धारित किये, दिये गये ऋण पर जब तक वापसी की मांग नहीं की जाती, तब तक उस राशि पर कोई ब्याज देय नहीं होता। हां, मांग करने पर और वापसी के लिए समय देने पर निर्धारित समय पर ऋण न लौटाये जाने पर परवर्ती अवधि के लिए पांच प्रतिशत की दर से ब्याज देय होता है। एष वृद्धिविधिः प्रोक्तः प्रीतिदत्तस्य कर्मणः। वृद्धिस्तु योक्ता धान्यस्य बार्धुषं तदुदाहृतम्॥ 110 ॥ 92 / नारदस्मृति

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित) · पृष्ठ 94, कुल 304 में से · BharatKosha