भारतकोश
संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Sankshipta Narasimha Purana Gita Press

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 318 में से

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पृष्ठ 80

अध्याय १९ ] विश्वकर्माद्वारा १०८ नामोंसे भगवान् सूर्यका स्तवन ६९ ८. शम्भुः—कल्याणकारी, ९. त्वष्टा—विश्वकर्मा अथवा विश्वरूपी शिल्पके निर्माता, १०. मार्तण्डः—मृत अण्डसे प्रकट, ११. आशुगः—शीघ्रगामी ॥ ३ ॥ १२. हिरण्यगर्भः—ब्रह्मा, १३. कपिलः— कपिलवर्णवाले अथवा कपिलमुनिस्वरूप, १४. तपनः— तपने या ताप देनेवाले, १५. भास्करः—प्रकाशक, १६. रविः—रव—वेदत्रयीकी ध्वनिसे युक्त अथवा हिरण्यगर्भः कपिलस्तपनो भास्करो रविः। भूतलके रसोंका आदान (आकर्षण) करनेवाले, १७. अग्निगर्भोऽदितेः पुत्रः शम्भुस्तिमिरनाशनः॥ ४ अग्निगर्भः—अपने भीतर अग्निमय तेजको धारण करनेवाले, १८. अदितेः पुत्रः—अदितिदेवीके पुत्र, शम्भुः— कल्याणके उत्पादक, १९. तिमिरनाशनः—अन्धकारका नाश करनेवाले ॥ ४ ॥ २०. अंशुमान्—अनन्त किरणोंसे प्रकाशमान, २१. अंशुमाली—किरणमालामण्डित, २२. तमोघ्नः— अन्धकारनाशक, २३. तेजसां निधिः—तेज अथवा प्रकाशके भण्डार, २४. आतपी—आतप या घाम प्रकट अंशुमानंशुमाली च तमोघ्नस्तेजसां निधिः। करनेवाले, २५. मण्डली—अपने मण्डल या विम्बसे आतपी मण्डली मृत्युः कपिलः सर्वतापनः॥ ५ युक्त, २६. मृत्युः—मृत्युरूप अथवा मृत्युके अधिष्ठाता यमको जन्म देनेवाले, २७. कपिलः सर्वतापनः— भूरी या सुनहरी किरणोंसे युक्त होकर सबको संताप देनेवाले ॥ ५ ॥ २८. हरिः—सूर्य अथवा पापहारी, २९. विश्वः— सर्वरूप, ३०. महातेजाः—महातेजस्वी, ३१. सर्वरत्न- हरिर्विश्वो महातेजाः सर्वरत्नप्रभाकरः। प्रभाकरः—सम्पूर्ण रत्नों तथा प्रभापुञ्जको प्रकट करनेवाले, अंशुमाली तिमिरहा ऋग्यजुस्सामभावितः॥ ६ ३२. अंशुमाली तिमिरहा—किरणोंकी माला धारण करके अन्धकारको दूर करनेवाले, ३३. ऋग्यजुस्सामभावितः—ऋग्वेद, यजुर्वेद तथा सामवेद— इन तीनोंके द्वारा भावित या प्रतिपादित ॥ ६ ॥ ३४. प्राणाविष्करणः—प्राणोंके आधारभूत अन्न आदिकी उत्पत्ति और जलकी वृष्टि करनेवाले, प्राणाविष्करणो मित्रः सुप्रदीपो मनोजवः। ३५. मित्रः—'मित्र' नामक आदित्य अथवा सबके यज्ञेशो गोपतिः श्रीमान् भूतज्ञः क्लेशनाशनः॥ ७ सुहृद्, ३६. सुप्रदीपः—भलीभाँति प्रकाशित होनेवाले अथवा सर्वत्र उत्तम प्रकाश बिखेरनेवाले, ३७. मनोजवः—मनके समान या उससे भी अधिक तीव्र वेगवाले, ३८. यज्ञेशः—यज्ञोंके स्वामी नारायणस्वरूप, ३९. गोपतिः—किरणोंके स्वामी अथवा भूमि एवं गौओंके पालक, ४०. श्रीमान्—कान्तिमान्, ४१. भूतज्ञः—सम्पूर्ण भूतोंके ज्ञाता अथवा भूतकालकी बातोंको