भारतकोश
संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Sankshipta Narasimha Purana Gita Press

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 79, कुल 318 में से

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पृष्ठ 79

६८ श्रीनरसिंहपुराण [ अध्याय १९ विश्वकर्मा चागत्य आदित्यं नामभिः स्तुत्वा | धारण कर लिया। त्वष्टा प्रजापतिकी पुत्री संज्ञा भी अश्वाका | रूप छोड़कर अपने साक्षात् स्वरूपमें प्रकट हो गयी। उस तदतिशयोष्णतांशतामपशातयामास ॥ २३॥ | अवस्थामें सूर्यदेव त्वष्टाकी पुत्री अपनी पत्नी संज्ञाको | आदित्यलोकमें ले गये। तदनन्तर विश्वकर्मा सूर्यके पास एवं वः कथिता विप्रा अश्विनोत्पत्तिरुत्तमा । | आये और उन्होंने विविध नामोंद्वारा उनका स्तवन किया | तथा उनकी अनुमतिसे ही उनके श्रीअङ्गोंकी अतिशय पुण्या पवित्रा पापघ्नी भरद्वाज महामते ॥ २४ | उष्णताके अंशको कुछ शान्त कर दिया ॥ २१-२३॥ | महामते भरद्वाज तथा अन्य ब्राह्मणो! इस प्रकार आदित्यपुत्रौ भिषजौ सुराणां | मैंने आपलोगोंसे दोनों अश्विनीकुमारोंके जन्मकी उत्तम, | पुण्यमयी, पवित्र एवं पापनाशक कथा कह सुनायी। दिव्येन रूपेण विराजमानौ। | सूर्यके वे दोनों पुत्र देवताओंके वैद्य हैं। अपने | दिव्यरूपसे सदा प्रकाशित होते रहते हैं। उन दोनोंके श्रुत्वा तयोर्जन्म नरः पृथिव्यां | जन्मकी कथा सुनकर मनुष्य इस भूतलपर सुन्दर रूपसे | सुशोभित होता है और अन्तमें स्वर्गलोकमें जाकर वहाँ भवेत् सुरूपो दिवि मोदते च ॥ २५ | आनन्दका अनुभव करता है॥ २४-२५॥ इति श्रीनरसिंहपुराणे अश्विनोरुत्पत्तिर्नाम अष्टादशोऽध्यायः ॥ १८ ॥ इस प्रकार श्रीनरसिंहपुराणमें 'दोनों अश्विनीकुमारोंकी उत्पत्ति' नामक अठारहवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ १८ ॥ उन्नीसवाँ अध्याय विश्वकर्माद्वारा १०८ नामोंसे भगवान् सूर्यका स्तवन भरद्वाज उवाच | भरद्वाजजी बोले-सूतजी! विश्वकर्माने जिन यैः स्तुतो नामभिस्तेन सविता विश्वकर्मणा । | नामोंके द्वारा भगवान् सूर्यका स्तवन किया था, उन्हें मैं | सुनना चाहता हूँ। आप सूर्यदेवके उन नामोंका वर्णन तान्यहं श्रोतुमिच्छामि वद सूत विवस्वतः ॥ १ | करें ॥ १ ॥ सूत उवाच | सूतजीने कहा- ब्रह्मन् ! विश्वकर्माने जिन नामोंद्वारा तानि मे शृणु नामानि यैः स्तुतो विश्वकर्मणा । | भगवान् सविताका स्तवन किया था, उन सर्वपापहारी सविता तानि वक्ष्यामि सर्वपापहराणि ते ॥ २ | नामोंको तुम्हें बतलाता हूँ, सुनो ॥ २ ॥ | १. आदित्यः - अदितिके पुत्र, २. सविता- | जगत्के उत्पादक, ३. सूर्यः- सम्पत्ति एवं प्रकाशके आदित्यः सविता सूर्यः खगः पूषा गभस्तिमान्। | स्रष्टा, ४. खगः - आकाशमें विचरनेवाले, ५. पूषा- | सबका पोषण करनेवाले, ६. गभस्तिमान् - सहस्रों तिमिरोन्मथनः शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्ड आशुगः ॥ ३ | किरणोंसे युक्त, ७. तिमिरोन्मथनः - अन्धकारनाशक,