निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
साहिब बन्दगी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (उद्गम)
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बढ़ती भी है। बेचारे पाखण्डियों पर तरस भी आता है कि कितनी मेहनत करते हैं, पर उसका रिजल्ट उलटा ही होता है। बाद में खुद बेचारे यह देख परेशान हो जाते हैं कि साहिब-बंदगी वाले तो भी हार नहीं मान रहे हैं; एक जगह सत्संग नहीं होने दो तो दूसरी जगह पहुँच जाते हैं; वहाँ अपनी गंदी हरकत का परिचय दो तो तीसरी जगह पहुँच जाते हैं; पर रुकते नहीं हैं; कहीं न कहीं रास्ता ढूँढ़ ही निकालते हैं और संगत भी ऐसी है कि कहीं भी प्रोग्राम हो, पहुँच जाती है। संगत पर आपका इतना रंग देख वे आखिर खुद परेशान हो जाते हैं और कुछ देर के लिए शांत हो जाते हैं। पर आपका सिलसिला नहीं रुकता। उन पंथों की पोल को समझ लोग टूटकर आपके पास आते रहते हैं। जब बड़े-बड़े टूटते हैं तो आमदनी कम होते देख उनके पेट का दर्द फिर बढ़ जाता है और वे फिर अपनी गंदी हरकतें दिखाना शुरू कर देते हैं। जैसे किसी को प्रेम का रोग हो जाता है तो किसी डॉ० की कोई दवा काम नहीं आती है। ऐसे ही इनके पेट का दर्द किसी गोली से नहीं जाता है। उसका हल ही निंदा है, उसका हल ही गंदी हरकतें है, सत्संग में रुकावट डालना है।
क्या ऐसे लोगों को यह नहीं पता है कि उनका आख़िर क्या हाल होगा ! एक शेर होता है; हिरण उसके सामने बड़ी कलाबाजी दिखाता है, बड़ी तेज़ भागकर दिखाता है। शेर चाहे तो उसे जल्दी पकड़ ले, पर वो ऐसा नहीं करता; वो उसे भागने देता है। जब भागते-भागते वो थक जाता है, उसका खून गर्म हो जाता है, तब शेर उससे एक फीट लंबी 28 फीट छलांग लगाता है और उसे पकड़ लेता है। ऐसे ही अभी आप इन पाखण्डियों को अपने खेल दिखाने दे रहे हैं, पर जब आप अपना खेल दिखायेंगे तो इनका वजूद ही मिट जायेगा।
पाखण्डियों के पास आपकी प्रोग्राम लिस्ट रहती है। उन्हें ठीक-ठीक मालूम रहता है कि आप कब और कहाँ प्रोग्राम देने वाले हैं। जब