भारतकोश
निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

साहिब बन्दगी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (उद्गम)

DevanagariHindipublished112 पृष्ठ

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26 साहिब बन्दगी

भी आपका ओपन प्रोग्राम परेड ग्राउण्ड, जम्मू में होता है तो वे रुकावट देने की सोचते हैं। कई बार उन्हें इसमें सफलता भी मिल जाती है। वे उन्हें अधिक पैसा खिलाकर पहले से आपके सत्संग के लिए बुक हुई ग्राउण्ड को भी अपने पाखण्ड और स्वार्थ के लिए बुक करवा लेते हैं। दुनिया तो ऐसी है ही। चाहे वे नाचें-गायें, कुछ भी करें, लोग पहुँचते-ही-पहुँचते हैं। खैर, दुनिया को तो सच्चाई का पता नहीं होता कि बाबा जी कैसा है, उनका लक्ष्य क्या है! पर जो बाबा जी के साथी होते हैं, वे कैसे भक्त हुए! वे भक्त हो ही नहीं सकते हैं। वे भी पाखण्डी ही हुए। क्या वे धूर्त नहीं हुए! पक्का हुए। बाबा जी खुद तो छल-कपट करके नरक में जा ही रहे हैं, पर साथ-ही-साथ चेलों को भी पकड़कर ले जा रहा है। चेले बेचारों का क्या कसूर! उन्हें तो माँ के गर्भ में 9-10 महीने वाला कष्ट भूल गया है न, इसलिए दोबारा अब नरकों की मार का स्वाद चखना चाहते हैं।

आप इसके बावजूद शांत रहते हैं; उनकी तरह ऐसे धूर्त वाले काम नहीं करते। यही तो आपमें और उनमें बाहरी दृष्टि से मुख्य अन्तर नज़र आता है। यह किसी एक बाबा की बात नहीं समझ लेना। इस जहाँ में आप सबसे निराले हैं। इसलिए सबका मुकाबला ही आप के साथ है।

कुछ स्त्रियों को, छोटे-छोटे बच्चों को जानबूझकर आगे कर देते हैं। दुनिया एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए बड़े तमाशे कर रही है। सब एक तरफ हैं और आप एक तरफ। फिर भी वे आपके हौसले को दबा नहीं पाते हैं। जितनी रुकावटें वे देते जाते हैं, आप उतना अधिक परिश्रम करके उन्हें शिष्ट तरीके से जबाब देते जाते हैं और आखिर में वे हारकर थक जाते हैं और कुछ देर शांत पड़े रहकर पुनः अपनी घिनौनी हरकतें शुरू कर देते हैं। उन्हें क्या मालूम कि आप थकने वालों में हैं ही नहीं। आप तो कई-कई रातें बिना सोए भी गुज़ार लेते हैं; कई-कई दिन बिना कुछ खाए भी रह लेते हैं। पर बाकी महात्मा यह सब तो कर नहीं सकते हैं। साहिब जी के