निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
साहिब बन्दगी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंनिराले सद्गुरु 33
तो यह है कि आपको कई बार कुछ ख़बर ही नहीं होती है। आपको बताना पड़ता है कि आपने नाश्ता नहीं किया है।
आप शरीर की थकान को मंजूर नहीं करते हैं। एक वो भी समय था, जब आप छः-छः महीने तक सोते नहीं थे। पर तब आप इतना कठिन परिश्रम नहीं कर रहे थे। अब जब आपकी संगत दिनो दिन बढ़ रही है तो कई बार आपको 10-10, 12-12 दिन तक सोने का अवसर नहीं मिल पाता है। कभी आप बीच में दिन को आराम करने की सोचते हैं तो वो भी नहीं हो पाता है। ऐसे में आपका शरीर अत्यंत ही थका हुआ लगता है। पर आपके वजूद को कभी थका हुआ नहीं पाया जा सकता है। आपकी वाणी की वही लय रहती है। आपके सफ़रनामे को सुनकर हर कोई हैरान रह जायेगा। उसे मंजूर करना ही पड़ेगा कि आप इंसान नहीं हैं। यदि वो ऐसा नहीं कर रहा है तो यह उसकी भूल है। जैसा काम आप कर रहे हैं, कोई इंसान के बस की बात नहीं है। कोई भूत भी इतना काम नहीं कर सकता है। वो भी थक जायेगा, पर आप थकने वालों में से नहीं हैं। आपका शरीर भी तौबा करता होगा कि किसके पल्ले पड़ गया हूँ। जितना परिश्रम आप करते हैं, कोई नहीं कर सकता है। कई-कई बार आपको भोजन करने का समय भी नहीं मिलता है। जो कठिन परिश्रम आप करते हैं, आज के महात्मा तो आपके साथ दो दिन रहकर ही तौबा कर देगा। क्योंकि अपने हक़ की कमाई से खाने की बात तो सुनने को मिलती है, परिश्रम करने की बात भी मिलती है, पर जितना परिश्रम आप करते हैं, इतना परिश्रम करने की बात किसी संत के बारे में पढ़ने-सुनने को नहीं मिलती है। फिर उस बीच आपकी चाल भी इतनी तेज़ रहती है कि जो काम एक घण्टे में करने वाला होता है, आप आधे घण्टे में कर लेते हैं। फिर आपका अपनी संगत पर होल्ड भी बड़ा प्यारा है। एक सच्चे कमाण्डर की तरह आप सबको चलाते हैं। फिर खुद भी उस काम में जुट जाते हैं। जितने भी आश्रम हैं, उनके जितने भी काम हैं, उन सबकी ख़बर आपको ही लेनी है। यह काम कोई भी दो दिन