निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)
Niruktam of Maharshi Yaska with Nighantu and Hindi Commentary
महर्षि यास्क मुनि द्वारा
DevanagariHindipublished1,282 पृष्ठ
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हिन्दी निरुक्त ( १७ ) ४ अ० १ पा० १ खं० ४६ | अदितिः | अदीना। देवमाता [पा०४खं०१] | "अदितिद्यौः" । ५१ | जहुरिम् | जरस्थ् । [पा० ४ खं० ३] | "नीचायमानंजहुरिं न श्येनम्" ५२ | मन्दी. | मन्दतेः स्तुतिकर्मणः । [पा०४ खं० ३] | "प्रमन्दिने पितुमदर्चता वचः" ५६ | दंसयः | कर्माणि । [पा० ४ खं०४] | "कुत्साय मन्मन्नह्यश्व दंसयः" । ५७ | तूताव | तुताव । [पा० ४ खं० ४] | "स तूताव" । ३