निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)
Niruktam of Maharshi Yaska with Nighantu and Hindi Commentary
महर्षि यास्क मुनि द्वारा
DevanagariHindipublished1,282 पृष्ठ
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❀ हिन्दी निरुक्त ❀
नैगम काण्ड चतुर्थोऽध्यायः १मः पादः (खं० १) ━༻❁༺━ अथ निघण्टौ चतुर्थोऽध्यायः । [निघ०] जहा (१) निधा (२) शिताम (३) मेहना (४) दमूनाः (५) मूषः (६) इषिरेण (७) कुरुतन (८) जठरे (६) तितउ (१०) शिप्रे (११) मघ्या (१२) मन्दू (१३) ईर्मान्तासः (१४) कायमानः (१५) लोधम् (१६) शीरम् (१७) विद्रधे (१८) द्रुपदे (१९) तुग्वनि (२०) नंसन्ते (२१) नमन्त (२२) आहनसः (२३) अञ्जसत् (२४) इष्मिणः (२५) वाहः (२६) परितक्म्या (२७) सुविते (२८) दयते (२६) नूचित् (३०) नूच (३१) ४