भारतकोश
नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

Niti Shataka of Bhartrihari Hindi

महाराज भर्तृहरि द्वारा

स्रोत: Neeti Shataka with Sanskrit Shlokas, Anvaya & Hindi Commentary by Dr. Rakesh Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished194 पृष्ठ

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भूमिका

संस्कृत भारत की ही नहीं, अपितु विश्व की सर्वाधिक प्राचीन भाषा है। सम्पूर्ण विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ ऋग्वेद भी इसी भाषा में निबद्ध है। भारत के प्राचीन वास्तविक स्वरूप को जानने के लिए हमारे समक्ष संस्कृत भाषा के अतिरिक्त कोई उपाय नहीं है।

संस्कृत में निबद्ध साहित्य भी इतना समृद्ध है कि उसकी उपमा अथवा साम्य विश्व के किसी भी अन्य साहित्य के साथ करना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है।

इस सम्पूर्ण साहित्य को हम प्रथमतः दो भागों में विभाजित कर सकते हैं। १. वैदिक संस्कृत साहित्य २. लौकिक संस्कृत साहित्य। वैदिक साहित्य के अन्तर्गत संहिता ग्रन्थों से लेकर ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद्, वेदाङ्ग एवं सूत्र ग्रन्थों तक समस्त साहित्य आ जाता है।

वैदिक संस्कृत के समानान्तर ही एक लौकिक संस्कृत की धारा भी अविरत गति से प्रवाहमान होती दिखाई देती है। जिसके दर्शन हमें पुराणों में होते हैं। सम्भवतः इसी कारण विद्वानों ने “पुराणं पञ्चमो वेदः” कहकर उसे वेद के निकट माना। यह संस्कृत अत्यन्त सरल एवं जनसामान्य की रही।

किन्तु बाद में रामायण काल से इसी भाषा में काव्यों की रचना की गई। जहाँ से लौकिक संस्कृत के व्यवस्थित रूप से दर्शन होते हैं। इसी कारण रामायण को आदिकाव्य और महाकवि वाल्मीकि को आदिकवि कहा जाता है।

उपलब्ध समस्त लौकिक संस्कृत साहित्य को शैली की दृष्टि से प्रथमतः दो भागों में विभाजित किया जा सकता है— दृश्यकाव्य और श्रव्यकाव्य। दृश्य काव्य के अन्तर्गत रूपक उपरूपक आदि आते हैं तथा श्रव्य काव्य को तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं— गद्य, पद्य और चम्पूकाव्य।

इनमें भी पद्य काव्य के पुनः दो भेद महाकाव्य और खण्डकाव्य तथा गद्य काव्य के कथा और आख्यायिका किए जा सकते हैं। पद्यकाव्य के भेद खण्डकाव्य को विषय की दृष्टि से स्तोत्र, नीति और शृंगारि काव्य के रूप में तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है। इस सम्पूर्ण विभाजन को इस प्रकार भी प्रदर्शित कर सकते हैं—


                              काव्य
                   _____________|_____________
                  |                           |
                श्रव्य                       दृश्य
         _________|_________             _____|_____
        |         |         |           |           |
       गद्य      पद्य      चम्पू       रूपक       उपरूपक
        |         |                     |           |
    (१) कथा    महाकाव्य             (नाटकादि     (नाटिकादि
    (२) आख्यायिका  |                 १० भेद)     १८ भेद)
              खण्डकाव्य (गीति काव्य)
                  |
        १. स्तोत्र  २. नीति  ३. शृंगारि