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नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

Niti Shataka of Bhartrihari Hindi

महाराज भर्तृहरि द्वारा

स्रोत: Neeti Shataka with Sanskrit Shlokas, Anvaya & Hindi Commentary by Dr. Rakesh Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished194 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 194 में से

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पुस्तक परिचय

संस्कृत में खण्डकाव्य के अन्तर्गत स्तोत्र एवं नीति-विषयक काव्य प्रायः मुक्तक काव्य के रूप में उपलब्ध होते हैं। महाकवि भर्तृहरि द्वारा विरचित शृंगारशतक, नीतिशतक तथा वैराग्य शतक, मुक्तक काव्य के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। इस शतक के सौ से अधिक श्लोकों में कवि ने विद्या, परोपकार, वीरता, परिश्रम, साहस और उदारता आदि उदात्त मनोभावों का सरल भाषा में मनोहारी चित्रण किया है। इसमें कवि के ऐश्वर्य सम्पन्न राजाओं की निष्ठुरता, हृदयहीनता, अहंकारिता, दुर्जनों एवं मूर्खों के द्वारा सज्जनों को दिए जाने वाले कष्टों एवं अपमान का चित्रण करते हुए, उसके प्रति विद्रोहात्मक स्वर को मुखरता मिली हैं। अनेक नैतिक सिद्धान्तों का प्रतिपादन करते हुए, मानवतावादी दृष्टिकोण को अत्यन्त हृदयग्राही रूप में यहाँ चित्रित किया गया है। वस्तुतः नीतिशतकम् सम्पूर्ण सूक्ति-साहित्य का अलंकार स्वरूप ग्रन्थ है, जिसमें अनेक दीप्तिमान् माणिक स्थल-स्थल पर जड़े हुए हैं।


लेखक परिचय

राजकीय महाविद्यालय, बांसवाड़ा में स्नातकोत्तर संस्कृत-विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत डॉ० राकेश शास्त्री संस्कृत के लिए पूर्णतया समर्पित व्यक्तित्व हैं। आपने राजस्थान के सुदूर आदिवासी जनजाति बहुल अंचल में संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए अनेक कार्य करके उल्लेखनीय योगदान दिया है। यही कारण है कि आज इस क्षेत्र में युवापीढ़ी में संस्कृत के प्रति रुझान बढ़ा है।

२० मार्च १९५५ में मेरठ के निकट दोराला ग्राम में जन्मे डॉ० शास्त्री ने सभी परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की हैं। साथ ही बी०ए० (आनर्स), १९७५ की परीक्षा में महाविद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्तकर वि० वी० की मैरिट लिस्ट में छठा स्थान प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त पुराणितिहासाचार्य परीक्षा में सम्पूर्णानन्द संस्कृत वि० वी० में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। आपका शोधकार्य ऋग्वेद के निपातों पर है।

आपकी अबतक वेद, उपनिषद्, दर्शन, व्याकरण साहित्य एवं पुराणों पर लगभग १० पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। संस्कृत को सरल करने की दिशा में आपका उल्लेखनीय योगदान है। आपकी एक व्याकरण पुस्तक "स्नातक संस्कृत सरला' को राजस्थान संस्कृत अकादमी द्वारा मार्च, ९७ में नवोदित प्रतिभा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

अध्ययन, अध्यापन, लेखन एवं शोध में आपकी गहन रुचि है। बहुत शीघ्र ही आपकी कुछ अन्य पुस्तकें प्रकाशित होने वाली हैं।

प्रकाशित-पुस्तक सूची

१. ऋग्वेद के नियात, २. मार्कण्डेय महापुराण (हिन्दी अनुवाद), ३. मधु कणिका४. स्नातक संस्कृत सरला, ५. नीतिशतकम्, ६. ऋक् सूक्त चन्द्रिका, ७. बृहदारण्य कोपनिषद् (तृतीय अध्याय), ८. सुगम संस्कृत व्याकरण, ९. सांख्यकारिका, १०. मनुस्मृति (द्वितीय अध्याय), ११. नागानन्दम्